भारतीय मांग को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया में तुवर उत्पादन बढ़ाने पर जोर
25-Nov-2025 06:14 PM
होबार्ट। ऑस्ट्रेलिया में घरेलू खपत कम होने के कारण मुख्यतः निर्यात उद्देश्य के लिए विशाल मात्रा में दलहन और खासकर देसी चना और मसूर का उत्पादन किया जाता है और इसके केन्द्र में भारत होता है।
भारत दुनिया में दलहनों का सबसे प्रमुख उत्पादक एवं उपभोक्ता के साथ-साथ आयातक देश भी है वहां खासकर अरहर (तुवर), उड़द, मसूर, देसी चना एवं मटर का भारी आयात होता है।
भारत को ऑस्ट्रेलिया पहले से ही देसी चना और मसूर का भारी निर्यात कर रहा है मगर वहां तुवर एवं उड़द का उत्पादन नहीं या नगण्य और मटर का उत्पादन भी सीमित होता है इसलिए भारत में वहां से इन दलहनों का आयात भी होता है।
लेकिन भारत की नियमित विशाल मांग को देखते हुए ऑस्टेलिया में अब तुवर का घरेलू उद्योग स्थापित किए जाने का प्रयास हो रहा है। एक व्यापारिक कम्पनी तथा क्वींसलैंड प्रान्त के प्राथमिक उद्योग विभाग द्वारा संयुक्त रूप से तुवर की खेती के लिए फिल्ड परीक्षण किया जा रहा है ताकि भारतीय मांग को पूरा किया जा सके।
कम्पनी का कहना है कि तुवर भारत में प्रोटीन का एक स्थायी स्रोत है और वहां तुवर दाल के रूप में बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल किया जाता है।
इसके अलावा अफ्रीका के कुछ देशों तथा म्यांमार आदि में भी इसकी खपत होती है। तुवर का सर्वाधिक उत्पादन भारत, अफ्रीका और म्यांमार में होता है।
अफ्रीका तथा म्यांमार से इसका भारी मात्रा में निर्यात होता है जो अधिकांशतः भारतीय बाजार में पहुंचता है। ऑस्ट्रेलिया में अगर उत्पादन बढ़ाने का प्रयास सफल हुआ तो उसे भारत में इसका निर्यात करने में कामयाबी हासिल हो सकती है।
भारत में 35-40 लाख टन तुवर का उत्पादन एवं उपयोग होता है जबकि विदेशों से भी इसका भारी आयात किया जाता है। उधर अफ्रीका महाद्वीप में करीब 15 लाख टन तुवर का वार्षिक उत्पादन होता है जिसमें से 8-10 लाख टन का निर्यात भारत को किया जाता है।
म्यांमार में भी 3.00-3.50 लाख टन अरहर (तुवर) का सालाना उत्पादन होता है और इसके अधिकांश भाग या शिपमेंट भी भारत को किया जाता है। भारत में तुवर की मांग एवं खपत निरन्तर बढ़ते जाने की संभावना है जिससे ऑस्ट्रेलिया को वहां अपनी पहुंच बनाने का अच्छा अवसर मिल सकता है।
