बारिश की भारी कमी से आंध्र प्रदेश में फसलों को नुकसान
16-Sep-2026 11:29 AM
विजयवाड़ा। दक्षिण भारत के एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक राज्य- आंध्र प्रदेश को फिलहाल भयंकर सूखे के संकट का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वहां दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन में सामान्य औसत से बहुत कम वर्षा हुई है। राज्य के विभिन्न भागों में खेतों की मिटटी में नरमी का भारी अभाव होने से खरीफ फसलों के सूखने का खतरा पैदा हो गया है।
आंध्र प्रदेश में खरीफ फसलों की बिजाई तो लगभग सामान्य ढंग से हुई है लेकिन वर्षा की कमी से उसकी प्रगति में काफी बाधा पड़ रही है। खरीफ सीजन के दौरान वहां धान, मक्का, कपास एवं तुवर आदि की खेती बड़े पैमाने पर होती है। वर्षा के अभाव में धान का रकबा काफी घट गया है।
जून-अगस्त की तिमाही के दौरान आंध्र प्रदेश में केवल 197.6 मि०मी० बारिश हुई जो दीघकालीन औसत 424.10 मि०मी० के आधे से भी काफी कम है। वर्षा में 53.4 प्रतिशत की भारी गिरावट आने तथा बांधों-जलाशयों में पानी का स्टॉक कम रहने से खरीफ फसलों की सिंचाई नहीं हो सकी।
इससे उत्पादन घटने तथा किसानों की आय में कमी आने की आशंका बढ़ गई है। सामान्य औसत के मुकाबले मानसूनी वर्षा में कमी जून में 25.2 प्रतिशत थी जो जुलाई में बढ़कर 67.9 प्रतिशत पर पहुंच गई। अगस्त में भी बारिश की कमी 55.9 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर बरकरार रही।
इस बार रायल सीमा संभाग और दक्षिणी तटीय आंध्र प्रदेश में वर्षा का भारी अभाव देखा जा रहा है जबकि उत्तरी तटीय भाग के कुछ क्षेत्रों में बारिश की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। आंध्र प्रदेश में खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष की तुलना में तथा पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल के मुकाबले पीछे है और इसका ठीक से विकास भी नहीं हो रहा है।
