यूपीआई से भुगतान पर लगने वाले चार्ज का समझना आवश्यक
16-Sep-2026 12:56 PM
नई दिल्ली। यूपीआई से चुनिंदा लेन देन पर 15 अक्टूबर 2026 से एक मर्चेन्ट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने का निर्णय लिया गया है जिससे कारोबारियों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। यह जानने समझने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या यूपीआई से भुगतान करने के क्रम में यूजर्स (उपयोगकर्ताओं) को शुल्क या चार्ज का भुगतान करना आवश्यक होगा ? इसका संक्षिप्त उत्तर है- नहीं।
वस्तुतः नया एमडीआर व्यापारिक भुगतान (मर्चेंट-पेमेंट) इकोसिस्टम के अंतर्गत वसूला जाने वाला एक चार्ज है। यह कोई ऐसा शुल्क (फीस) नहीं है जिसका भुगतान ग्राहकों को यूपीआई से कारोबारी (आपसी) लेन-देन वाले समय चुकाना पड़ता है। व्यक्ति से व्यक्ति के बीच यूपी आई से राशि का हस्तांतरण चार्ज से बिल्कुल मुक्त रहेगा जबकि व्यापारियों को किए जाने वाले 2000 रुपए तक के भुगतान पर भी कोई चार्ज नहीं लगेगा। सरकार का कहना है कि इस नए प्रावधान से लगभग 96 प्रतिशत मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन अप्रभावित रहेगा।
लेकिन 2000 रुपए से ऊपर के कुछ खास मर्चेंट्स ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट साइड के खर्च में बदलाव हो जाएगा। मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) डिजीटल पेमेंट को स्वीकार करने से सम्बन्धित फीस है। नए फ्रेमवर्क के अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति किसी व्यापारी को 2000 रुपए से अधिक करोबार के लिए यूपीआई से भुगतान करता है तो इस पर 0.4 प्रतिशत का मानक एमडीआर प्रभावित होगा।
75 हजार रुपए या इससे अधिक के लेन देने के लिए एमडीआर की उच्चतम सीमा 300 रुपए प्रति ट्रांजैक्शन निर्धारित की गई है। यह नया नियम 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने वाला है।
