बासमती चावल के निर्यात डिक्लेरेशन पर एपीडा की एडवायजरी से व्यापारी चिंतित

25-Sep-2024 04:49 PM

नई दिल्ली । केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अधीनस्थ निएक्य एवं खाद्य खाद्य तथा कृषि जिंसों के निर्यात संचालन की प्राधिकृत एजेंसी- कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) द्वारा बासमती चावल के निर्यात हेतु डिक्लेरेशन के बारे में जो एडवायजरी जारी की निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है।

लेकिन एपीडा का दावा है कि इससे बासमती चावल के निर्यात अथवा निर्यातकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। एपीडा के एक प्रकोष्ठ- बासमती एक्सपोर्ट डवलपमेंट फाउंडेशन (बीईडीएफ) द्वारा यह एडवायजरी जारी की गई है जिसे निर्यातक हैरान है

कि क्या उसे बासमती चावल उद्योग को रेग्युलेट करने का अधिकार है और क्या यह एडवायजरी कानूनी रूप से वैध है। इस पर एपीडा के अधिकारियों का कहना है कि यह एडवायजरी न तो अनिवार्य है और न ही बंधनकारी।

उल्लेखनीय है कि बीईडीएफ द्वारा गत 12 सितम्बर 2024 को यह एडवायजरी जारी की गई थी जिसमें कहा गया था कि किसी पैकेट या थैली में वही उत्पाद होना चाहिए जिसका वर्ष 1966 के बीज अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित बासमती चावल के नाम के किसी खास किस्म या श्रेणी की पैकिंग हुई है तो उसके लेवल पर भी वही नाम अंकित होना चाहिए। 

लेकिन व्यापारियों-निर्यातकों की चिंता का कारण कुछ और है। एडवायजरी में कहा गया है कि लेबल पर बासमती चावल की श्रेणी का नाम लिखना अनिवार्य नहीं है लेकिन यह उत्पाद खरीदारों / आयातक देशों की जरूरतों के अनुरूप अवश्य होना  चाहिए।

संक्षेप में कहा जाए तो यदि ईरान के आयातक पुसा 1121 बासमती चावल के आयात का अनुबंध करते है तो उसे अन्य श्रेणी के बासमती चावल का निर्यात नहीं किया जाना चाहिए। खास किस्मों के धान-चावल का पता लगाने का काम मंडियों (एग्री टर्मिनल या बाजार अथवा खेतों के स्तर से ही शुरू होना चाहिए।

यह थोड़ा जटिल काम है। निर्यातकों का कहना है कि सही किस्म का पता लगाने के लिए एडवायजरी में किसी खास प्रक्रिया का वर्णन नहीं किया गया है और न ही इसके निरीक्षण-परीक्षण के तौर-तरीकों के बारे में कोई विवरण दिया गया है। 

बीईडीएफ के निदेशक का कहना है कि यह एडवायजरी केवल निर्यातकों को यह सुझाव देने के लिए है कि वे कोई भ्रामक या गलत जानकारी न दे।

वे जिस किस्म के चावल का निर्यात कर रहे हैं केवल उसका ही नाम अंकित करें। इससे वैश्विक बाजार में भारतीय बासमती चावल की विश्वसनीयता बढ़ेगी और निर्यातकों को विवाद से बचने में सहायता मिलेगी।