बासमती चावल के निर्यात पंजीकरण शुल्क में हुई वृद्धि का विरोध

03-Oct-2025 06:18 PM

नई  दिल्ली। पंजाब तथा हरियाणा के बासमती चावल निर्यातक संघ ने निर्यात अनुबंधों के रजिस्ट्रेशन पर शुल्क को सरकार द्वारा 30 रूपए प्रति टन से बढ़ाकर 70 रूपए प्रति टन निर्धारित करने के निर्णय पर आपत्ति व्यक्त करते हुए इसे वापस लेने की जोरदार मांग की है।

उद्योग समीक्षकों के अनुसार अगर भारत से बासमती चावल का निर्यात 2024-25 वित्त वर्ष के बराबर रहता है तो एपीडा का निर्यात सौदों के पंजीयन शुल्क से वित्त वर्ष 2025-26 में राजस्व 73 प्रतिशत उछलकर 31 करोड़ रूपए पर पहुंच जाएगा। दूसरी ओर बासमती चावल के निर्यातकों की आमदनी में जोरदार गिरावट आ जाएगी। 

हालांकि बासमती चावल के निर्यात ऑफर मूल्य एवं शिपमेंट की विशाल मात्रा के सापेक्ष यह पंजीकरण शुल्क काफी छोटा प्रतीत होता है लेकिन निर्यातकों का कहना है कि पंजाब में विनाशकारी बाढ़ से न केवल बासमती धान की फसल को नुकसान पहुंचा है बल्कि खेतो में बालू-रेत जन्म अवशिष्ट अवयवो का जमावड़ा भी हो गया है

जिससे किसानो को भारी कठिनाई हो रही है खेतों को साफ करने में बासमती एक्सपोर्ट डवलपमेंट (बीईडीएफ) के कोष का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। चूंकि पंजीकरण शुल्क को टैक्स या सेस की श्रेणी में नहीं रखा गया है इसलिए इससे उपार्जित राशि के उपयोग में असमंजस्य की स्थिति रहेगी। 

31 मार्च 2025 को बोर्ड को बीईडीएफ में करीब 25 करोड़ रूपए की राशि मौजूद थी। मई 2005  में बीईडीएफ ने निर्णय लिया था कि निर्यातकों से तब तक कोई योगदान नहीं लिया जाएगा जब तक यह जमा राशि घटकर 10 करोड़ रूपए से नीचे नहीं आ जाती।

इसे देखते हुए सरकार को अभी निर्यात अनुबंधों पर पंजीकरण शुल्क में बढ़ोत्तरी नहीं करनी चाहिए बल्कि इस शुल्क वसूली को स्थगित रखना चाहिए था। वर्ष 2005-2012 तक इसे स्थगित रखा गया था।

लेकिन वर्ष 2013 में पंजीकरण शुल्क 50 रूपए प्रति टन लागू किया गया और फिर 2014 में इसे घटाकर 30 रूपए प्रति टन निर्धारित किया गया। फिलहाल इसे बढ़कर 70 रूपए प्रति टन करने की कोई आवश्यकता नहीं है। 

हरियाणा राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने खुलासा किया है कि 24 जून 2025 को आयोजित बीईडीएफ बोर्ड की मीटिंग में बासमती चावल के लिए पंजीकरण-सह-आवंटन प्रमाण पत्र की फीस में बढ़ोत्तरी करने के प्रस्ताव पर न तो कोई चर्चा हुई और न ही उसे अनुमोदित किया गया लेकिन फिर भी उसे लागू कर दिया गया। यह सचमुच हैरानी की बात है।