चालू वर्ष के दौरान भी कपास का बिजाई क्षेत्र घटने की संभावना

01-Apr-2025 12:57 PM

मुम्बई। अमरीकी कृषि विभाग (उस्डा) की विदेश कृषि सेवा का भारतीय प्रतिनिधि कार्यालय (पोस्ट) के अनुसार 2024-25 सीजन के दौरान भारत में कपास का उत्पादन क्षेत्र घटकर 118 लाख हेक्टेयर रह गया था

जबकि 2025-26 के खरीफ सीजन में बिजाई क्षेत्र और भी 3 प्रतिशत या 4 लाख हेक्टेयर गिरकर 114 लाख हेक्टेयर पर सिमट जाने की संभावना है।

चालू मार्केटिंग सीजन में कपास का घरेलू बाजार भाव नीचे रहने से इसकी खेती में किसानों का आकर्षण कुछ घट सकता है और इसलिए वे कपास के बजाए दलहन-तिलहन फसलों की बिजाई को प्राथमिकता दे सकते हैं। 

उस्डा पोस्ट के मुताबिक बिजाई क्षेत्र में थोड़ी गिरावट आने के बावजूद 2025-26 के मार्केटिंग सीजन के दौरान भारत में रूई का उत्पादन 250 लाख गांठ (480 पौंड की प्रत्येक गांठ) पर स्थिर रहेगा जो 2024-25 सीजन के उत्पादन के लगभग बराबर है।

दरअसल उस्डा पोस्ट ने रूई की औसत उपज दर में कुछ सुधार आने की उम्मीद जताई है। उसका कहना है कि यदि दक्षिण-पश्चिम मानसून की सामान्य वर्षा हुई तो भारत में रूई की औसत उत्पादकता दर सुधरकर 2025-26 के सीजन में 477 किलो प्रति हेक्टेयर पर पहुंच सकती है

जो 2024-25 की औसत उपज दर 461 किलो प्रति हेक्टेयर से करीब 3 प्रतिशत ऊंची है। सिंचाई सुविधा तथा पर्याप्त वर्षा वाले इलाकों में फसल की हालत बेहतर रहने की उम्मीद है। 

पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक कपास का क्षेत्रफल पंजाब में स्थिर रहेगा जबकि हरियाणा ने 5 प्रतिशत घट सकता है। वहां धान का रकबा बढ़ने की उम्मीद है। दोनों राज्यों में कपास की उपज दर में थोड़ी कमी आ सकती है।

राजस्थान में भी क्षेत्रफल 2 प्रतिशत घटने की संभावना व्यक्त करते हुए पोस्ट में कहा है कि वहां किसान ग्वार मक्का एवं मूंग का क्षेत्रफल बढ़ा सकते हैं।

गुजरात में भी कपास का बिजाई क्षेत्र 3 प्रतिशत घटने का अनुमान लगाया गया है। वहां मूंगफली की बिजाई बढ़ सकती है।

महाराष्ट्र में रकबा गत वर्ष के लगभग बराबर ही रहने की उम्मीद है मगर मध्य प्रदेश में यह 5 प्रतिशत गिर सकता है। दक्षिण भारत में किसान मक्का एवं धान की खेती पर विशेष ध्यान दे सकते हैं जिससे कपास का बिजाई क्षेत्र कुछ घटने की संभावना है।