चीनी के निर्यात पर अचानक प्रतिबंध लगने से उद्योग को भारी झटका
15-May-2026 01:07 PM
मुम्बई। केन्द्र सरकार द्वारा चीनी के निर्यात पर अचानक 30 सितम्बर 2026 तक रोक लगाने की घोषणा किए जाने से स्वदेशी उद्योग स्तब्ध एवं हैरान है। अभी फरवरी में ही तो सरकार ने चीनी का निर्यात कोटा 5 लाख टन बढ़ाने का निर्णय लिया था जबकि मध्य मई से पूर्व ही पूरे निर्यात को रोकने का फैसला कर लिया।
कुछ समीक्षकों का कहना है कि घरेलू प्रभाग में आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति को सुगम बनाए रखने तथा कीमतों में संभावित तेजी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सरकार ने चीनी का निर्यात रोकने का फैसला किया है जबकि कुछ अन्य विश्लेषकों ने सरकारी निर्णय पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि इससे भविष्य में गन्ना उत्पादकों का हित प्रभावित हो सकता है।
कुछ जानकारों ने तो यहां तक कहा है कि निर्यात पर रोक लगाने के बावजूद सरकार को अपने उदेश्य को हासिल करने में सफलता शायद नहीं मिल पाएगी। पिछले कुछ सप्ताहों के अंदर चीनी का एक्सफैक्टरी मूल्य 3500-3600 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर 3800-4000 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचा है और इसमें तत्काल गिरावट आना मुश्किल लगता है।
2025-26 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन में चीनी का घरेलू उत्पादन उम्मीद से काफी कम होने का अनुमान है और सीजन के अंत में उद्योग के पास बकाया स्टॉक भी ज्यादा नहीं बचेगा। अगले सीजन के उत्पादन का परिदृश्य भी धुंधला नजर आ रहा है।
2025-26 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान चीनी का सकल उत्पादन (खाद्य उद्देश्य के लिए) 279.50 लाख टन पर सिमटने की संभावना है जबकि पहले 309.50 लाख टन और फिर 290 लाख टन के उत्पादन का अनुमान लगाया गया था।
मार्केटिंग सीजन के अंत में यानी 30 सितम्बर 2026 को उद्योग के पास चीनी का बकाया स्टॉक घटकर 38-39 लाख टन रह जाने का अनुमान है जो पिछले साल 50 लाख टन आंका गया था। निर्यात प्रतिबंध से करीब 12-15 लाख टन चीनी की बचत का अवसर मिल सकता है लेकिन इससे कुल उपलब्धता की स्थिति कितनी सुधरती है यह देखना दिलचस्प होगा।
