चीनी का उत्पादन 18 प्रतिशत घटकर 248.50 लाख टन पर अटका

02-Apr-2025 11:32 AM

नई दिल्ली। गन्ना की भारी कमी के कारण चीनी मिलें लगातार तेजी से बंद होती जा रही हैं और इसके फलस्वरूप गन्ना क्रशिंग का सीजन जल्दी ही समाप्त होने की संभावना है।

सहकारी चीनी मिलों की शीर्ष संस्था- नेशनल फेडरेशन ऑफ को ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज के आंकड़ों से पता चलता है कि चालू मार्केटिंग सीजन की पहली छमाही में यानी 1 अक्टूबर 2024 से 31 मार्च 2025 के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर चीनी का कुल उत्पादन घटकर 248.50 लाख टन पर अटक गया

जो 2023-24 सीजन की समान अवधि के उत्पादन 302.50 लाख टन से 18 प्रतिशत या 54 लाख टन कम रहा। मार्च 2025 के प्रथम  पखवाड़े की तुलना में दूसरे पखवाड़े के दौरान चीनी के उत्पादन में 6 लाख टन की गिरावट दर्ज की गई। 

फेडरेशन के अनुसार केवल मार्च 2025 में ही देश भर में करीब 234 चीनी मिलें बंद हुई। इसे मिलाकर चालू मार्केटिंग सीजन में अब तक राष्ट्रीय स्तर पर कुल 420 इकाइयों में गन्ना की क्रशिंग समाप्त हो चुकी है। इसके सापेक्ष अक्टूबर 2023 से मार्च 2024 के दौरान 331 इकाइयां ही बंद हुई थीं।

31 मार्च 2025 को देश की 113 चीनी मिलों में गन्ना की क्रशिंग जारी थी जबकि पिछले साल की समान अवधि में 204 चीनी मिलें क्रियाशील थीं।

दिलचस्प तथ्य यह है कि गत वर्ष मार्च में बंद होने वाली चीनी मिलों की संख्या 257 पर पहुंच गई थी लेकिन इस बार शुरू से ही मिलों को गन्ना की पर्याप्त मात्रा हासिल करने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ रहा है। 

फेडरेशन ने 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में चीनी का शुद्ध उत्पादन घटकर 259 लाख टन पर सिमट जाने का अनुमान लगाया है जो 2023-24 सीजन के उत्पादन 319 लाख टन से 60 लाख टन या 19 प्रतिशत कम है। महाराष्ट्र में 194 चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं और केवल 6 इकाइयों में गन्ना की क्रशिंग जारी है।

वहां 31 मार्च तक 80.10 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ। इसी तरह कर्नाटक में 75 इकाइयों के बंद होने के बाद सिर्फ 4 मिलें क्रियाशील रह गई हैं और राज्य में 31 मार्च तक 39.90 लाख टन चीनी का उत्पादन दर्ज किया गया।

उत्तर प्रदेश में 87.70 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है और कुछ इकाइयां अभी गन्ना की क्रशिंग कर रही हैं।