चीनी मिलों के जल्दी बंद होने से बाजार मजबूत रहने के आसार

13-Feb-2025 08:11 PM

नई दिल्ली । गन्ना की भारी कमी के कारण तीनों शीर्ष उत्पादक राज्यों - महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश एवं कर्नाटक में चीनी मिलें धड़ाधड़ बंद होने लगी हैं जबकि अनेक अन्य इकाइयां अपनी कुल क्रशिंग क्षमता के आधे भाग का ही इस्तेमाल करने में सक्षम हो रही है।

गन्ना की कमी से जुड़ रहे इन प्लांटों में भी फरवरी के अंत तक ताले पड़ जाने की संभावना है। दरअसल विभिन्न क्षेत्रों में गन्ना का स्टॉक तेजी से घटने के कारण प्लांटों की अपनी गतिविधियां जारी रखने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ रहा है। 

उत्पादन घटने की आशंका तथा सरकार की निर्यात नीति का चीनी के घरेलू बाजार गहरा सकारात्मक एवं मनोवैज्ञानिक असर पड़ रहा है और कीमतों में तेजी मजबूती का माहौल बना हुआ है। निकट भविष्य में चीनी का दाम ज्यादा नीचे आने की संभावना नहीं है।

उद्योग-व्यापार क्षेत्र के अनेक अग्रणी संघों- संगठनों ने चीनी का घरेलू उत्पादन 2023-24 सीजन के 319-320 लाख टन से घटकर 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में 265-270 लाख टन के बीच रह जाने का अनुमान लगाया है जबकि घरेलू उपयोग 290 लाख टन होने की संभावना व्यक्त की है।

10 लाख टन का निर्यात होने पर चीनी की कुल निकासी 300 लाख टन पर पहुंच जाएगी। पिछला स्टॉक इस बार काम आएगा जबकि चालू सीजन के अंत में महज 42.45 लाख टन का अधिशेष स्टॉक बनने की उम्मीद है।

यदि 2025-26 के सीजन में कम से कम 300 लाख टन शुद्ध खाद्य उद्देश्य की चीनी का उत्पादन नहीं हुआ तो न केवल इसके दाम में जोरदार बढ़ोत्तरी हो जाएगी बल्कि विदेशों से इसके आयात की आवश्यकता अभी पड़ सकती है। 

दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन की वर्षा गन्ना की फसल के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण मानी जाती है। पिछले साल मानसून की अच्छी बारिश हुई और इस वर्ष भी यदि बरसात ठीक-ठाक रही तो गन्ना की पैदावार अगले सीजन में बेहतर हो सकती है।

इससे चीनी का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद बनी रहेगी। अन्यथा चीनी बाजार में जटिलता बढ़ने की आशंका पैदा हो सकती है।