चीन और भारत में अनिश्चित स्थिति से कनाडाई मटर पर दबाव

11-Apr-2025 01:04 PM

वैंकुवर। बदले की कार्रवाई के तहत चीन ने कनाडाई मटर एवं कैनोला पर 100 प्रतिशत का आयात शुल्क लगा दिया है जबकि भारत में पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की अवधि 31 मई 2025 को समाप्त होने वाली है।

मटर सहित अन्य रबी कालीन दलहनों (चना-मसूर आदि) की जोरदार आवक होने तथा कीमतों पर दबाव बढ़ने से प्रतीत होता है कि मई के बाद भारत में मटर का आयात रोकने का प्रयास किया जा सकता है।

यदि कनाडा के हाथ से भारत और चीन का विशाल बाजार फिसल गया तो उसके उत्पादकों एवं निर्यातकों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। 

कनाडा की मंडियों में अभी सीजनल कारणों से मटर का कारोबार सुस्त पड़ गया है। आमतौर पर वहां प्रत्येक वर्ष जब नई फसल की बिजाई का समय आता है तब कीमतों में उतार-चढ़ाव का माहौल बन जाता है।

विदेशी खरीदारों का ध्यान बिजाई तथा अगली फसल पर केन्द्रित हो जाता है। इस बार चीन की नीति के कारण कनाडाई मटर की कीमतों पर दबाव कुछ ज्यादा देखा जा रहा है। 

व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक कनाडाई मटर की निर्यात मांग लगातार कमजोर पड़ती जा रही है और निकट भविष्य में इसके मजबूत होने की संभावना बहुत कम है।

चीन के पास अगले कुछ महीनों तक की जरूरत को पूरा करने के लिए मटर का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और वहां रूस से इसका भारी आयात भी हो रहा है।

रूस में जुलाई-अगस्त से नई मटर की आवक शुरू हो जाएगी और इसलिए चीन को कनाडाई मटर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। 

दिलचस्प तथ्य यह है कि सीमित कारोबार के बावजूद कनाडा में पीली मटर का एफओबी भाव 10 डॉलर प्रति बुशेल के आसपास स्थिर बना हुआ है

जबकि अगली फसल की खरीद का अनुबंध मूल्य 8-9 डॉलर प्रति बुशेल बताया जा रहा है। हरी मटर का दाम कुछ घटकर 15.50 डॉलर प्रति बुशेल पर आ गया है जबकि इसकी अगली फसल के लिए 12.50-13.00 बुशेल का भाव चल रहा है।

कनाडा में मटर की बिजाई का सीजन औपचारिक तौर पर आ गया है। पहले वहां इसके क्षेत्रफल में कुछ बढ़ोत्तरी होने का अनुमान लगाया जा रहा था मगर अब बदले में वैश्विक हालात में अनिश्चितता बढ़ गई है।