चीनी उत्पादन का सीजन नियत समय से पूर्व ही समाप्त होने की संभावना

01-Apr-2025 05:48 PM

नई दिल्ली। देश के अधिकांश प्रमुख उत्पादक राज्यों में चीनी का उत्पादन एवं गन्ना की क्रशिंग का सीजन बिल्कुल अंतिम चरण में पहुंच गया है और शीघ्र ही इसके समाप्त हो जाने की संभावना है। इसमें महाराष्ट्र- कर्नाटक एवं तमिलनाडु जैसे राज्य भी शामिल है।

इसके अलावा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा एवं उत्तराखंड जैसे राज्यों में भी चीनी मिलों में गन्ना की क्रशिंग अत्यन्त धीमी गति से हो रही है।

इन प्रांतों की तुलना में उत्तर प्रदेश की हालत कुछ बेहतर है जो देश में गन्ना का सबसे बड़ा तथा चीनी का दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है।

2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन के दौरान महाराष्ट्र पीछे छोड़कर उत्तर प्रदेश भारत में चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य बन सकता है। 

2023-24 सीजन की तुलना में 2024-25 के मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान चीनी के घरेलू उत्पादन में 50-60 लाख टन तक की जोरदार गिरावट आने का अनुमान लगाया जा रहा है क्योंकि गन्ना की पैदावार कम हुई, गन्ना से चीनी की औसत रिकवरी दर घट गई और एथनॉल निर्माण में गन्ना का उपयोग बढ़ गया।

अधिकांश चीनी मिलों को गन्ना के अभाव का सामना करना पड़ा जिससे उसकी गतिविधि बंद हो गई। महाराष्ट्र में चीनी मिलों की पेराई क्षमता काफी बढ़ गई है इसलिए वहां गन्ना की उपलब्ध मात्रा की क्रशिंग जल्दी हो गई और जब गन्ना की आपूर्ति बंद हो गई तो चीनी मिलों में भी ताला लग गया। 

सरकार ने 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन के लिए 10 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी है और घरेलू उत्पादन में जोरदार गिरावट आने की आशंका के बावजूद निर्यात कोटा को बरकरार रखने का संकेत दिया है।

इससे मिलर्स को राहत मिल रही है। चीनी का घरेलू बाजार भाव ऊंचे स्तर पर बरकरार है जिससे गन्ना किसानों के बकाए का भुगतान करने में मिलर्स को आसानी हो रही है।

मार्केटिंग सीजन के अंत में उद्योग के पास चीनी का सीमित स्टॉक मौजूद रहेगा जिससे इसके भंडारण एवं रख-रखाव के खर्च में कमी आएगी।

एथनॉल का बेहतर उत्पादन होने में डिस्टीलारीज की आमदनी बढ़ने की उम्मीद है। चीनी उद्योग को लम्बे समय के बाद इस बार अनुकूल अवसर प्राप्त हो रहा है।