चीनी उद्योग द्वारा सरकार से एथनॉल खरीद का मूल्य बढ़ाने का आग्रह

03-Jun-2025 04:48 PM

नई दिल्ली। चीनी उद्योग का कहना है कि सरकार को गन्ना से निर्मित एथनॉल की खरीद का मूल्य बढ़ाने पर तत्काल ध्यान देना चाहिए क्योंकि पेट्रोल में मिश्रण के लिए इसकी भागीदारी घटकर 28 प्रतिशत रह गई है।

नेशनल फेडरेशन ऑफ को ऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज का कहना है कि एक तरफ एथनॉल का दाम स्थिर बना हुआ है तो दूसरी ओर गन्ना के उचित एवं लाभकारी मूल्य में प्रति वर्ष इजाफा होता जा रहा है। इससे एथनॉल का उत्पादन ज्यादा लाभप्रद साबित नहीं हो रहा है।

कुछ समय पूर्व तक राष्ट्रीय एथनॉल प्रोग्राम में चीनी से निर्मित एथनॉल की हिस्सेदारी 73 प्रतिशत थी जो अब घटकर महज 28 प्रतिशत रह गई है जबकि दूसरी ओर अनाजों से निर्मित एथनॉल की भागीदारी 27 प्रतिशत से उछलकर 72 प्रतिशत पर पहुंच गई है। 

चीनी उद्योग पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण का लक्ष्य भी 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाने की मांग कर रहा है। इसके अलावा एथनॉल की मांग बढ़ाने और ऊंचे मिश्रण लक्ष्य के लिए तैयारी सुनिश्चित करने हेतु फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल्स (एफएफबी) का उत्पादन बढ़ाने का आग्रह भी किया गया है। 

फेडरेशन के अनुसार 2022-23 के मार्केटिंग सीजन के दौरान चीनी उद्योग ने एथनॉल के उत्पादन में 43 लाख टन चीनी के समतुल्य गन्ना का उपयोग किया था और 369 करोड़ लीटर एथनॉल की आपूर्ति करने में सफल रहा था जो राष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोल के साथ हुए एथनॉल के कुल मिश्रण का 73 प्रतिशत था।

लेकिन 2023-24 के मार्केटिंग सीजन में गन्ना (चीनी) से निर्मित एथनॉल की आपूर्ति घटकर 270 करोड़ लीटर रह गई जो राष्ट्रीय मिश्रण कार्यक्रम का केवल 38 प्रतिशत था।

2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में यह मात्रा और भी घटकर 250 करोड़ लीटर या 28 प्रतिशत पर अटक जाने की संभावना है जबकि कुल मिश्रण का लक्ष्य 900 करोड़ लीटर का है। 

उत्पादन में आई भारी गिरावट का मुख्य कारण यह है कि गन्ना के अनुपात में एथनॉल का दाम नहीं बढ़ाया गया जिससे चीनी मिलों के लिए एथनॉल का उत्पादन कम लाभप्रद साबित हो रहा है।

हालांकि इस वर्ष एथनॉल निर्माण में 40 लाख टन तक चीनी के उपयोग की गुंजाईश है मगर वास्तविक उपयोग 32 लाख टन के आसपास ही होने की उम्मीद है।