चावल का निर्यात नियंत्रण मुक्त होने से कृषि उत्पादों का कुल निर्यात बेहतर होने के आसार
13-Nov-2024 06:23 PM
नई दिल्ली । केन्द्र सरकार ने साबुत श्रेणी के बासमती तथा गैर बासमती चावल के निर्यात को सभी नियंत्रणों एवं प्रतिबंधों से मुक्त कर दिया है जिससे इसके शिपमेंट में भारी बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है। इसके सहारे वित्त वर्ष 2024-25 (अप्रैल-मार्च) के दौरान देश से कृषि उत्पादों के कुल निर्यात से प्राप्त आमदनी बढ़कर 50 अरब डॉलर को पार कर जाने की उम्मीद है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार गैर बासमती सफेद चावल, गेहूं तथा चीनी के व्यापारिक निर्यात पर प्रतिबंध लगने के कारण कृषि उत्पादों की कुल निर्यात आय में करीब 6-7 अरब डॉलर की गिरावट आ गई थी।
इसी तरह मोटे अनाजों और खासकर मक्का का निर्यात भी घट गया। हालांकि अभी गेहूं एवं चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध लागू है मगर सफेद चावल का शुल्क मुक्त निर्यात शुरू हो गया है। सेला चावल का निर्यात भी शुल्क मुक्त कर दिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि चालू वित्त वर्ष में अभी तक कृषि उत्पादों का निर्यात प्रदर्शन अच्छा रहा है जबकि सफेद चावल का सहारा मिलने से यह और भी बेहतर हो जाएगा।
इसे देखते हुए अगर कुल निर्यात आय 50 अरब डॉलर की सीमा को पार कर जाए तो कोई हैरानी की बात नहीं होगी। ध्यान देने की बात है कि अभी तक निर्यात की विकास दर घनात्मक नहीं रही है मगर दिसम्बर तक यह इस जोन में पहुंच सकती है।
चावल का निर्यात पिछले वित्त वर्ष के 140-150 लाख टन से बढ़कर चालू वित्त वर्ष में 170-180 लाख टन पर पहुंच सकता है जबकि अमरीकी कृषि विभाग ने इसके 215 लाख टन पर पहुंचने का अनुमान लगाया है। इससे निर्यात को मजबूत सहारा मिलेगा।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक बासमती चावल का निर्यात 55 लाख टन तक पहुंचने की उम्मीद है जबकि गैर बासमती सेला चावल का निर्यात 70-80 लाख टन के करीब हो सकता है। इसके अलावा लगभग 40 लाख टन सफेद चावल का शिपमेंट होने का अनुमान है।
चालू वित्त वर्ष के दौरान जिन कृषि उत्पादों के निर्यात में अच्छी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है उसमें फल, सब्जियां, मीट एवं इसके प्रोडक्ट्स एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद शामिल है।
अधिकारियों का कहना है कि गेहूं एवं चीनी के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने का अभी कोई प्लान नहीं है क्योंकि इसके लिए परिस्थितियां अनुकूल नहीं है।
केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने वर्ष 2030 तक देश से कृषि उत्पादों का सालाना निर्यात बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है जिसके लिए चावल के शिपमेंट को बरकरार रखना तथा अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करना आवश्यक होगा।
