चावल की सरकारी खरीद बढ़कर 457 लाख टन से ऊपर पहुंची

03-Apr-2025 05:51 PM

नई दिल्ली। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि 2024-25 के खरीफ मार्केटिंग सीजन में 31 मार्च 2025 तक राष्ट्रीय स्तर पर चावल की कुल सरकारी खरीद बढ़कर 457.30 लाख टन पर पहुंच गई जो गत वर्ष की समान अवधि की खरीद 452.50 लाख टन से करीब 1 प्रतिशत ज्यादा है। 28 फरवरी तक चावल की खरीद 5 प्रतिशत आगे चल रही थी मगर मार्च में खरीद की गति धीमी पड़ गई। 

केन्द्र सरकार ने 2024-25 के खरीफ सीजन में चावल का घरेलू उत्पादन 1206.80 लाख टन के शीर्ष स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया है जिसके 38 प्रतिशत भाग की खरीद केन्द्रीय पूल के लिए हो चुकी है।

मार्च में खरीद की गति धीमी पड़ने को विश्लेषक एक अच्छा संकेत (लक्षण) मानते हैं क्योंकि केन्द्रीय पूल में पहले से ही चावल का अत्यन्त विशाल स्टॉक मौजूद है और सरकार इसे घटाने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रही है।

घरेलू खाद्य सुरक्षा एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत करीब 410 लाख टन चावल के वार्षिक वितरण की जरूरत पड़ती है जबकि सरकारी खरीद इससे काफी अधिक हो चुकी है और इसका भारी- भरकम पिछला स्टॉक भी मौजूद है। अब 1 अप्रैल से रबी कालीन धान की सरकारी खरीद का सीजन भी औपचारिक तौर पर आरंभ हो गया है। 

पश्चिम बंगाल, आसाम, झारखंड एवं त्रिपुरा को छोड़कर देश के अन्य राज्यों में खरीफ कालीन धान की सरकारी खरीद 31 मार्च को समाप्त हो गई।

उड़ीसा एवं तेलंगाना जैसे प्रांतों में धान की खरीद लम्बे समय तक चलने की संभावना थी लेकिन इसे मार्च में ही खत्म कर दिया गया।

ध्यान देने की बात है कि सरकारी एजेंसियों द्वारा न्यूतनम समर्थ मूल्य पर किसानों से 457.30 लाख टन चावल के समतुल्य धान की खरीद की गई है और उसे कस्टम मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को आवंटित दिया गया है। 

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के स्वामित्व वाले गोदामों में चावल का अत्यन्त विशाल स्टॉक मौजूद है। हालत यह हो गई है कि पंजाब के मिलर्स एफसीआई के गोदामों पर कस्टम मिलिंग चावल की भरपूर आपूर्ति करना चाहते हैं अगर भंडारण सुविधा के अभाव में निगम द्वारा इस चावल की खेपों को स्वीकार करने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है।