छोटी इलायची में रि-पूलिंग का अर्थ

01-Jul-2024 08:49 PM

कोच्चि । मसाला बोर्ड ने नीलामी केन्द्रों में लाइसेंस धारी डीलर्स के लिए छोटी इलायची की रि-पूलिंग की सीमा निर्धारित कर दी है। पहले किसी एक नीलामी में 25 टन की रि-पूलिंग की स्वीकृति दी गई थी अगर अब यह 25 प्रतिशत नियत की गई है। इस मुद्दे पर इलायची के उत्पादकों एवं मसाला बोर्ड के साथ डीलर्स का घमासान चल रहा है।

मसाला बोर्ड ने कहा है कि यह निर्णय कोर्ट के दिशा निर्देश का आधार पर लिया गया है जो उत्पादकों के हित में है जबकि दूसरी ओर डीलर्स चैम्बर ने कहा है कि इससे छोटी इलायची उत्पादकों को भारी नुकसान होगा। उसने पुनः कोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दाखिल कर दी है। 

अब सवाल उठता है कि इलायची में यह रि-पूलिंग आखिर क्या है और केरल के उत्पादक इससे किस तरह प्रभावित होते हैं। दरअसल वैंडर्स (खरीदार) नीलामी केन्द्रों में उत्पादकों से इलैयहि खरीदते हैं और फिर दाने के रंग, आकार-प्रकार तथा तेल के अंश के आंध्र पर उसकी ग्रेडिंग करते हैं।

इसमें से सर्वोत्तम क्वालिटी वाली इलायची का विदेशों में निर्यात कर दिया जाता है और शेष बचे माल की द्वारा नीलामी की जाती है। इससे भाव घट जाता है और उत्पादकों को अपने माल का आकर्षक मूल्य प्राप्त नहीं होता है।

इतना ही नहीं बल्कि ये वेंडर्स ऐसे छोटे-छोटे उत्पादकों से भी इलायची खरीदते हैं जिनकी पहुंच नीलामी केन्द्रों तक नहीं होती है। इससे उन्हें घट बैठे अपने उत्पाद का दाम मिल जाता है।