एच टी बीटी कपास की खेती पर लगी पाबंदी को हटाने की मांग
28-Nov-2025 12:59 PM
नागपुर। हालांकि एच टी बीटी कॉटन को पर्यावरण के लिए हानिकारक माना जाता है और इसलिए इसकी व्यावसायिक खेती पर समूचे देश में प्रतिबंध लगा हुआ है लेकिन इसके बावजूद हजारों किसान गैर कानूनी रूप से इसका उत्पादन करते हैं। सरकार को भी इसकी जानकारी रहती है मगर इसे रोकने के लिए समुचित कदम नहीं उठाये जाते हैं।
किसान संगठनों ने आरोप लगाया है कि चोरी-छिपे एच टी बीटी कॉटन की खेती करने वाले उत्पादकों का विभिन्न तरीके से शोषण किया जा रहा है।
यदि कंपनियां इसके नकली या घटिया बीज की आपूर्ति करती है तो किसान उसके खिलाफ कहीं शिकायत नहीं कर सकता है क्योंकि इसकी खेती पहले से ही गैर कानूनी घोषित है।
इसे देखते हुए सरकार को इस खास किस्म की कपास की खेती को प्रतिबंध से मुक्त कर देना चाहिए ताकि उत्पादकों को आर्थिक शोषण का शिकार होने से बचाया जा सके।
उल्लेखनीय है कि गुजरात के बाद महाराष्ट्र देश में कपास का दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है जहां विदर्भ संभाग में बड़े पैमाने पर इसकी खेती होती है।
इस संभाग के यवतमाल जिले में लगभग 5 लाख हेक्टेयर में कपास की बिजाई हुई है लेकिन मौसम एवं वर्षा की अनिश्चित एवं अनियमित स्थिति के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हाल के वर्षों में विभिन्न कारणों से वहां कपास की उपज दर में काफी गिरावट आई है।
इसके अलावा कपास की कीमतों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है जबकि कपास की खेती के लिए लागत खर्च में नियमित रूप से बढ़ोत्तरी हो रही है।
सामान्य श्रेणी की कपास के लागत खर्च एवं बाजार भाव में असमानता को देखते हुए अनेक किसान अब एच टी बीटी कॉटन की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं
इसलिए सरकार को भी इस दिशा में उदार नीति लागू करनी चाहिए। इस वर्ष विदर्भ संभाग में कपास के कुल उत्पादन क्षेत्र में एच टी बीटी कॉटन की भागीदारी बढ़कर 40 प्रतिशत के करीब पहुंच गई।
