एथनॉल की उत्पादन क्षमता बढ़ने से उपयोग का दायरा बढ़ाने की जरूरत
05-Dec-2025 08:52 PM
नई दिल्ली। वर्तमान समय में पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण की सीमा 20 प्रतिशत निर्धारित है जबकि जैव ईंधन निर्माण उद्योग में इसकी जरूरत से ऊपर 4.50 अरब लीटर एथनॉल के अतिरिक्त या अधिशेष उत्पादन की क्षमता मौजूद है। इस क्षमता का उपयोग करने के लिए एथनॉल के उपयोग का दायरा बढ़ाये जाने की जरूरत है।
उद्योग समीक्षकों का कहना है कि फ्लेक्सी- फ्यूल वाहनों के प्रचलन को प्रोत्साहित करके उसमें एथनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग बढ़ाया जा सकता है।
इन वाहनों की डिजाइन इस तरह से तैयार की जाती है कि उसमें ऊंचे एथनॉल मिश्रण का इस्तेमाल आसानी से किया जा सकता है।
प्राइवेट चीनी मिलों की शीर्ष संस्था इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक का कहना है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल के मिश्रण का लक्ष्य हासिल हो चुका है।
अब इसका लक्ष्य आगे बढ़ाने की जरूरत है। सबसे आसान उपाए फ्लेक्सी फ्यूल एवं मजबूत हाईब्रीड वाहनों में एथनॉल मिश्रण का उपयोग बढ़ाना है।
इसकी टेक्नोलॉजी तैयार है। मूल उपकरण निर्माता / (ओईएम) इस तकनीक के साथ वाहनों के निर्माण के लिए तैयार हैं। अब केवल नीतिगत नियम का निर्धारण होना बाकी है ताकि वे वाहन सड़कों पर आ सके।
इसके आने से एथनॉल की आर्गेनिक खपत स्वाभाविक रूप से बढ़ जाएगी और एथनॉल निर्माताओं को अपनी पूरी उत्पादन क्षमता का उपयोग करने का अवसर प्राप्त हो जाएगा।
भारत में गन्ना के साथ-साथ चावल तथा मक्का से भी एथनॉल का विशाल उत्पादन होने लगा है फिर भी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो रहा है।
