फोर्टिफाइड चावल पर नए दिशा निर्देश से पंजाब के मिलर्स में रोष

10-Dec-2025 08:47 PM

चंडीगढ़। केन्द्र सरकार ने फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) चावल के उत्पादन एवं आपूर्ति के सम्बन्ध में जो नए दिशा निर्देश जारी किए हैं उससे पंजाब के राइस मिलर्स तथा भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के बीच नया टकराव आरंभ हो गया है।

केन्द्र सरकार ने कहा था कि पंजाब में इस वर्ष 156 लाख टन धान की खरीद हुई है और इसकी मिलिंग से 104 लाख टन चावल का निर्माण होगा। इसमें से कम से कम 25 लाख टन का स्टॉक अपग्रेडेड चावल के रूप में किया  जाएगा

जिसमें टूट वाले दाने का अंश महज 10 प्रतिशत होता है। शेष 80 लाख टन चावल केन्द्रीय पूल के लिए एफ आर के मिश्रित चावल के तौर पर स्वीकार किया जाएगा। 

एफआरके चावल की आपूर्ति में देरी होने से पंजाब में धान की मिलिंग का कार्य आरंभ नहीं हो सका है जबकि चावल मिलर्स के परिसरों में धान का अंबार लगा हुआ है।

इस धान की खरीद भारतीय खाद्य निगम एवं उसकी सहयोगी प्रांतीय एजेसनियों द्वारा किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करके उसे कस्टम मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को आवंटित किया गया था। चावल मिल मालिकों ने अन्य सरकारी दिशा निर्देश का विरोध करते हुए इस धान की मिलिंग रोक दी। 

पंजाब सरकार ने केन्द्र को पत्र भेजकर 25 लाख टन गैर एफआरके कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) को स्वीकार करने का अनुरोध किया है लेकिन केन्द्र सरकार ने अभी तक इस पर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया है। 

गत 28 नवम्बर 2025 को पंजाब के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निदेशक खाद्य निगम के चेयरमैन को इस आशय  का पत्र भेजा था जिसका अभी तक कोई जवाब नहीं दिया गया है। इससे पंजाब के राइस मिलर्स असमंजस में फंसे हुए हैं।