फरवरी मार्च के मौसम पर गेहूं का उत्पादन निर्भर

03-Feb-2026 09:06 PM

नई दिल्ली। इसमें कोई संदेह नहीं कि रबी सीजन के सबसे प्रमुख खाद्यान्न- गेहूं की खेती में भारतीय किसानों द्वारा इस बार भारी दिलचस्पी एवं सक्रियता दिखाई गई

जिससे राष्ट्रीय स्तर पर इसका उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया। यह उत्पादन क्षेत्र पिछले सीजन के रिकॉर्ड बिजाई क्षेत्र 328.04 लाख हेक्टेयर से 6.13 लाख हेक्टेयर तथा पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 312.35 लाख हेक्टेयर से लगभग 22 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। 

दिसम्बर-जनवरी के दौरान अधिकांश प्रमुख उत्पादक राज्यों में मौसम एवं बारिश की हालत गेहूं की फसल के लिए काफी हद तक सामान्य या अनुकूल बनी रही। फसल पर रोगों कीड़ों के प्रकोप की सूचना भी नहीं है।

मध्यवर्ती एवं पश्चिमोत्तर भारत के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में दिसम्बर 2025 के दौरान वर्षा का अभाव रहा लेकिन जनवरी 2026 के अंतिम दिनों में अच्छी बारिश होने से फसल की हालत बेहतर हो गई। 

अब सबका ध्यान फरवरी-मार्च के मौसम पर केन्द्रित हो गया है क्योंकि नवम्बर-दिसम्बर से लेकर जनवरी तक गेहूं के पौधों के विकास विस्तार का चरम रहता है जबकि फरवरी-मार्च में उसमें फूल एवं दाना लगने की प्रक्रिया रहती है।

यदि मौसम अनुकूल रहता है तो फसल में अच्छी दाने लगेंगे और इसकी औसत उपज दर तथा क्वालिटी में सुधार आएगा। लेकिन मौसम में गड़बड़ी उत्पन्न होने पर इसमें कमी आ सकती है। इससे उत्पादन में उम्मीद के अनुरूप इजाफा नहीं हो सकेगा।

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार 2024-25 के रबी सीजन में 1179.40 लाख टन गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ जबकि 2025-26 सीजन के लिए 1190 लाख टन के उत्पादन का लक्ष्य नियत किया गया है।

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास फिलहाल करीब 259 लाख टन गेहूं का विशाल स्टॉक मौजूद है जो 1 जनवरी के लिए नियत न्यूनतम आवश्यक बफर मात्रा 138 लाख टन से काफी अधिक है।

घरेलू खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार के पास पर्याप्त गेहूं   मौजूद है जबकि अगले दो माह से भी कम समय में इसके नए माल की जोरदार आपूर्ति आरंभ होने की संभावना है।