गेहूं का घरेलू उत्पादन नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की संभावना

02-Apr-2025 03:53 PM

नई दिल्ली। बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी होने तथा मौसम की हालत काफी हद तक अनुकूल रहने से चालू वर्ष के दौरान गेहूं का घरेलू उत्पादन बढ़कर एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने का दावा किया जा रहा है।

हालांकि केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2024-25 के रबी सीजन में देश के अंदर गेहूं का कुल उत्पादन बढ़कर 1154.30 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया है

जो 2023-24 सीजन के रिकॉर्ड उत्पादन 1132.90 लाख टन से 21.40 लाख टन ज्यादा  है मगर सरकार को भरोसा है कि इस वर्ष गेहूं का कुल उत्पादन इस अनुमान से भी अधिक हो सकता है। 

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पिछले दो सप्ताहों से देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में तापमान सामान्य स्तर से कुछ ऊंचा चल रहा है लेकिन इसके बावजूद गेहूं के बेहतर उत्पादन की उम्मीद बनी हुई है।

फसल का परिदृश्य शानदार नजर आ रहा है। सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से नया गेहूं खरीदना भी शुरू कर दिया है। औसत उपज दर में कमी आने की संभावना बहुत कम है। 

करनाल स्थित भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के निदेशक का कहना है कि वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए प्रतीत होता है कि गेहूं का वास्तविक उत्पादन 1154 लाख टन के सरकारी अनुमान से अधिक हो सकता है।

वैसे गेहूं के कुछ महत्वपूर्ण उत्पादक इलाकों में दिन का तापमान सामान्य औसत से 1-2 डिग्री सेल्सियस ऊंचा चल रहा है लेकिन रात का तापमान ठंडा होने से फसल को परिपक्व (मैच्योर) होने में अच्छी सहायता मिल रही है।

इसके अलावा चालू सीजन के दौरान कहीं से भी गेहूं की फसल पर यैलो रस्ट बीमारी के प्रकोप की सूचना नहीं मिल रही है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक गेहूं का बिजाई क्षेत्र 2023-24 सीजन के 315.60 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 के रबी सीजन में 320 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल से भी ज्यादा रहा।

मौसम के गर्म एवं शुष्क रहने से गेहूं की फसल को नुकसान होने की आशंका व्यक्त की जा रही थी और फरवरी के ऊंचे तापमान से इस आशंका को बल भी मिल रहा था लेकिन मार्च के पहले पखवाड़े में स्थिति काफी हद तक सामान्य हो गई।

गुजरात और राजस्थान जैसे प्रांतों में गर्मीं दोबारा लौटने लगी है इसलिए गेहूं की फसल को कुछ खतरा हो सकता है मगर जब तक हीट वेव का प्रकोप तीव्र होगा तब तक अधिकांश फसल की कटाई पूरी हो सकती है।