गेहूं की खेती में किसानों की जबरदस्त दिलचस्पी बरकरार

09-Dec-2025 01:22 PM

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में अच्छी बढ़ोत्तरी किए जाने और मौसम तथा नमी की हालत अनुकूल रहने से उत्साहित भारतीय किसान इस बार गेहूं की खेती में जबरदस्त दिलचस्पी दिखा रहे हैं जिससे रबी सीजन के इस सबसे प्रमुख खाद्यान्न का उत्पादन क्षेत्र उछलकर 241.40 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है जो पिछले साल की समानअवधि (5 दिसंबर) के बिजाई क्षेत्र 217.80 लाख हेक्टेयर से 23.60 लाख हेकेयर या 11 प्रतिशत अधिक है। इस बार गेहूं का सामान्य (पंचवर्षीय) औसत क्षेत्रफल 312.35 लाख हेक्टेयर आंका गया है।

पंजाब, हरियाणा एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहूं की अगैती बोआई होती है और वहां बिजाई की प्रक्रिया लगभग समाप्त हो चुकी है या बिलकुल अंतिम चरण में पहुंच गयी है। लेकिन मध्य प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, गुजरात एवं महाराष्ट्र जैसे महत्वपूर्ण उत्पादक प्रान्तों में बिजाई की प्रक्रिया अभी जारी है। इन तमाम राज्यों में गेहूं की नमी का पर्याप्त अंश मौजूद रहने एवं बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर ऊंचा होने के कारण किसान इस बार निश्चिन्त होकर जोर शोर से गेहूं की बिजाई कर रहे हैं।

केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2024-25 सीजन के 2425 रुपए प्रति क्विंटल से 16 रुपए बढ़ाकर 2025-26 सीजन के लिए 2585 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया है जो किसानों के लिए काफी आकर्षक माना जा रहा है। हालांकि गेहूं का थोक मंडी भाव घटकर नीचे आ गया है लेकिन इससे उत्पादकों के उत्साह एवं मनोबल पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ रहा है क्योंकि उसे पता है कि सरकार केंद्रीय पूल के लिए एमएसपी पर विशाल मात्रा में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न की खरीद अवश्य करेगी।

मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में किसानों को 2024-25 के रबी सीजन में गेहूं के लिए केंद्र द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर क्रमशः 175 रुपए एवं 150 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस देने की घोषणा की गयी थी और इस तरह मध्य प्रदेश के उत्पादकों को 2600 रुपए प्रति क्विंटल तथा राजस्थान के गेहूं उत्पादकों को 2575 रुपए प्रति क्विंटल का मूल्य प्राप्त हुआ था। किसानों को चालू सीजन में भी बोनस प्राप्त होने का भरोसा है।