गुजरात में फसल नुकसान एवं कमजोर भाव से कपास उत्पादक बेहद चिंतित

08-Dec-2025 04:21 PM

राजकोट। देश के सबसे प्रमुख रुई उत्पादक राज्य-गुजरात के किसान काफी चिंतित और परेशान है क्योंकि अक्टूबर में हुई अत्यंत मूसलाधार वर्षा के कारण कपास की फसल को भारी नुकसान हुआ और थोक मंडी भाव काफी नीचे रहने से किसानो को अपनी उपज का लागत खर्च भी हासिल नहीं हो रहा है। समझा जाता है कि कर्ज और कष्ट से परेशान होकर गुजरात में इस वर्ष अब तक 6 कपास उत्पादक किसान आत्महत्या कर चुके है। उत्पादक जल्दी से जल्दी सरकारी हस्तक्षेप की जोरदार मांग कर रहे है ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके। 

राजकोट और उसके आस-पास की मंडियों में कपास का भाव घटकर 6000-6500 रूपए प्रति क्विंटल रह गया है जो न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 7710 रूपए प्रति क्विंटल तथा 8110 रूपए प्रति क्विंटल से काफी पीछे है इसके आलावा अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में वहां इस समय मूसलाधार बारिश हो गई जब फसल की कटाई तैयारी शुरू होने वाली थी। 

गुजरात के मुख्य मंत्री ने बाढ़-वर्षा एवं जल जमाव से प्रभावित क्षेत्रो का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद किसानो के लिए लगभग 10,000 करोड़ रूपए के राहत सहायता पैकेज की घोषणा करते हुए कहा था कि उत्पादकों से एमएसपी पर 9 नवम्बर से 15,000 करोड़ रूपए से अधिक मूल्य की मूंगफली, सोयाबीन, मूंग एवं उड़द की खरीद की जाएगी। लेकिन अधिकांश प्रभावित किसानो की शिकायत है कि उन्हें अभी तक कोई राहत सहायता या मुआवजा प्राप्त नहीं हुआ है। किसानो को इस बार कपास, दलहन एवं मूंगफली की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। 

किसान संगठनो के अनुसार 25 अक्टूबर को अत्यंत मूसलाधार वर्षा से फसलों को भयंकर क्षति होने के बाद 6 किसान आत्महत्या कर चुके है जिसमे से 6 कपास उत्पादक थे लेकिन राज्य सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया है वैसे गुजरात में खरीफ कालीन फसलों की सरकारी खरीद आरम्भ हो चुकी है। मगर रुई के शुल्क मुक्त आयात से समस्या गंभीर होती जा रही है।