गुजरात में रबी फसलों का क्षेत्रफल गत वर्ष से 3.63 लाख हेक्टेयर पीछे
16-Dec-2024 06:09 PM
गांधी नगर । देश के पश्चिमी प्रान्त- गुजरात में इस बार रबी फसलों की बिजाई की गति पिछले साल से धीमी चल रही है। इसके तहत वहां गेहूं सहित अनाजी फसलों, तिलहनों तथा मसालों के उत्पादन क्षेत्र में गिरावट आई है। गन्ना का रकबा भी घटा है लेकिन चना सहित अन्य दलहनों के बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी हुई है।
समझा जाता है कि राज्य के कई क्षेत्रों में खरीफ फसलों की कटाई-तैयारी में विलम्ब होने से रबी फसलों की बिजाई देर से शुरू हुई और मसाला फसलों की खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण काफी घट गया।
राज्य कृषि विभाग की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले चालू रबी सीजन में सभी फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 40.78 लाख हेक्टेयर से 3.63 लाख हेक्टेयर घटकर 37.15 लाख हेक्टेयर रह गया है।
इसके तहत अनाजी फसलों का बिजाई क्षेत्र 12.12 लाख हेक्टेयर से घटकर 11.41 लाख हेक्टेयर, तिलहनों का क्षेत्रफल 2.65 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 2.42 लाख हेक्टेयर तथा गन्ना का रकबा 1.63 लाख हेक्टेयर से गिरकर 1.43 लाख हेक्टेयर पर अटक गया जबकि दूसरी ओर दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 6.07 लाख हेक्टेयर से बढ़कर इस बार 7.35 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
मसाला फसलों के संवर्ग में जीरा का उत्पादन क्षेत्र 5.30 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 3.77 लाख हेक्टेयर, धनिया का बिजाई क्षेत्र 1.15 लाख हेक्टेयर से गिरकर 1.04 लाख हेक्टेयर, ईसबगोल का रकबा 21 हजार हेक्टेयर से फिसलकर 16 हजार हेक्टेयर तथा सौंफ का
क्षेत्रफल 1.26 लाख हेक्टेयर से घटकर 38 हजार हेक्टेयर पर सिमत गया। राज्य के कुछ भागों में धीमी गति से मसाला फसलों की बिजाई अभी जारी है। जीरा और सौंफ का रकबा काफी पीछे है।
अनाजी फसलों में गेहूं का उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 10.73 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 10.02 लाख हेक्टेयर तथा ज्वार का रकबा 20 हजार हेक्टेयर से गिरकर 10 हजार हेक्टेयर रह गया मगर मक्का का क्षेत्रफल 1.03 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 1.15 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। अन्य मोटे अनाजों का बिजाई क्षेत्र 15 हजार हेक्टेयर पर स्थिर रहा।
दलहन फसलों में चना का उत्पादन क्षेत्र 5.65 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 6.72 लाख हेक्टेयर तथा अन्य दलहनों का बिजाई क्षेत्र 43 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 63 हजार हेक्टेयर हो गया।
तिलहन फसलों में सरसों का उत्पादन क्षेत्र 2.64 लाख हेक्टेयर से गिरकर 2.40 लाख हेक्टेयर रह गया जबकि अन्य तिलहनों की खेती सीमित क्षेत्रफल में हुई है।
