गन्ना किसानों को समय पर भुगतान के लिए चीनी का एमएसपी बढ़ना आवश्यक

08-Dec-2025 05:17 PM

मुंबई। चीनी का एक्स-फैक्ट्री न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) बढाने के लिए स्वदेशी उद्योग केंद्र सरकार सरकार पर लगातार दबाव डाल रहा है। उसका कहना है कि विभिन्न कारणों से पिछले पांच-छह साल के अन्दर चीनी के उत्पादन खर्च में भारी बढ़ोत्तरी हो चुकी है मगर इसका एमएसपी स्थिर बना हुआ है। इसमें मिलर्स को गन्ना किसानों को सही समय पर बकाया राशि का भुगतान करने में भारी कठिनाई हो रही है। इस पर गंभीरतापूर्वक विचार किए जाने की जरुरत है।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष गन्ना के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में बढ़ोत्तरी की जा रही है और प्रत्येक वर्ष गन्ना के राज्य समर्थित मूल्य (एसएपी) में भी इजाफा हुआ है जिससे चीनी उत्पादन का लागत खर्च बढ़कर 3900-4000 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है। दूसरी ओर इसके एमएसपी में वर्ष 2021 के बाद से ही कोई बदलाव नहीं किया गया है। उस समय भी इसे 2900 रुपए प्रति क्विंटल से 200 रुपए बढ़ाकर 3100 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया था। इस तरह चीनी के वास्तविक लागत खर्च एवं न्यूनतम बिक्री मूल्य में करीब 800-900 रुपए प्रति क्विंटल का भारी अंतर बना हुआ है।

उद्योग का कहना है कि गन्ना के एफआरपी तथा एसएपी में की जानेवाली वृद्धि के अनुरूप चीनी के एमएसपी में बढ़ोत्तरी होनी चाहिए ताकि मिलर्स को गन्ना का दाम सही समय पर चुकाने में कोई कठिनाई न हो। गन्ना का एफआरपी 2019-20 के सीजन में 275 रुपए प्रति क्विंटल नियत हुआ था जो नियमित रूप से बढ़ते हुए 2025-26 के सीजन में 355 रुपए प्रति क्विंटल हो गया। इस तरह इसमें 29 प्रतिशत का जोरदार इजाफा हो गया और इसलिए चीनी का लागत खर्च भी नियमित रूप से बढ़ता गया। महाराष्ट्र और कर्नाटक में चीनी का उत्पादन खर्च 3750 रुपए प्रति क्विंटल तथा राष्ट्रीय स्तर पर 3900 रुपए प्रति क्विंटल अनुमानित हो रहा है।