Home News
28-Sep-2026 04:51 PM
मुंबई। एथनोल का उत्पादन बढ़ने पर न केवल किसानों की आमदनी में इजाफा होगा बल्कि ईंधन (खनिज तेल) के आयात में कमी भी आएगी जिससे इस पर खर्च होने वाली राशि में कटौती करना संभव हो सकेगा। एथनोल का निर्माण सिर्फ गन्ना अवयवों से ही नहीं बल्कि चावल, मक्का एवं अन्य क्षतिग्रस्त अनाजों से भी होता है। इस तरह अनाज उत्पादकों ने भी बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने में एथनोल सहायक साबित हो सकता है।
केंद्र सरकार एथनोल के उत्पादन को लगातार प्रोत्साहित कर रही है ताकि पेट्रोल में इसकी अधिक से अधिक मात्रा का मिश्रण संभव हो सके। फ़िलहाल पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनोल के मिश्रण का लक्ष्य हासिल हो चुका है।
2026-27 के मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान एथनोल के उत्पादन में गन्ना जूस/सीरप तथा बी हैवी शीरा के उपयोग की सीमा में कटौती होने की सम्भावना है क्योंकि गन्ना की पैदावार घट सकती है और सरकार चीनी का उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दे सकती है। अगले महीने से गन्ना की क्रशिंग आरम्भ होने की सम्भावना है। चालू खरीफ सीजन में चावल तथा मक्का के उत्पादन में भी कमी आने का अनुमान है।