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28-Sep-2026 05:58 PM
नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गेहूं का भाव ऊंचा एवं तेज हो गया है। रूस तथा यूक्रेन सस्ते गेहूं के शिपमेंट में बाधा पड़ने से अन्य निर्यातक देशों - अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ़्रांस, जर्मनी तथा अर्जेंटीना आदि को दाम बढ़ाकर अपने गेहूं का निर्यात करने का अवसर मिल रहा है। इससे दक्षिण एशिया के दूरस्थ देशों के लिए भारतीय गेहूं आकर्षक एवं लाभप्रद प्रतीत होने लगा है।
बांग्लादेश, श्रीलंका तथा नेपाल जैसे देश पहले भी भारतीय गेहूं की खरीद करते थे लेकिन मई 2022 से जब इसके निर्यात पर प्रतिबन्ध लग गया तब उन देशों को अन्य आपूर्तिकर्ताओं से इसका आयात करना पड़ा। अब भारत सरकार ने गेहूं के निर्यात में पूरी तरह नियंत्रण मुक्त कर दिया है इसलिए निकटवर्ती पडोसी देश इसकी खरीद में अच्छी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
अमरीकी कृषि विभाग (उस्डा) की विदेश कृषि सेवा (फास) ने अपनी एक रिपोर्ट में 2026-27 सीजन के दौरान भारत से गेहूं का निर्यात चार गुणा से अधिक बढ़कर 20 लाख टन पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में निर्यात योग्य गेहूं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और इसका मूल्य भी प्रतिस्पर्धी स्तर पर चल रहा है। बांग्लादेश, नेपाल एवं श्रीलंका तो भारत से गेहू की खरीद आरम्भ कर चूका है जबकि अब संयुक्त अरब अमीरात तथा इंडोनेशिया जैसे देश भी इसकी खरीद का प्लान बना रहे हैं। भारत में इस बार गेहूं का सरकारी स्टॉक काफी ऊंचा हो गया है जबकि रूस-यूक्रेन से इसके निर्यात में बाधा पड़ रही है। बांग्लादेश भारत से भारी मात्रा में गेहूं खरीद सकता है।