गैर बासमती चावल के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने पर हो सकता है विचार
17-Jul-2024 05:50 PM
नई दिल्ली । केन्द्रीय पूल में चावल का भारी-भरकम अधिशेष स्टॉक मौजूद है और ढाई महीने बाद खरीफ कालीन धान चावल की नई खरीद आरंभ होने वाली है। चालू वर्ष के दौरान मानसून की अच्छी वर्षा होने धान के उत्पादन क्षेत्र में बढ़ोत्तरी होने के आसार हैं।
इसे देखते हुए सरकार गैर बासमती सफेद चावल के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को वापस लेने लेने पर विचार कर सकती है।
ज्ञात हो कि जुलाई 2023 से इसके व्यापारिक निर्यात पर रोक लगी हुई है जबकि निर्यातक उसे हटाने की जोरदार मांग कर रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि वरिष्ठ मंत्रियों का एक पैनल इस मुद्दे पर विचार कर सकता है लेकिन कुछ अन्य विश्लेषकों को लगता है कि चावल का निर्यात पर लगे प्रतिबंध को वापस लेने पर अंतिम निर्णय को तब तक स्थगित रखा जा सकता है जबकि तक खरीफ कालीन धान के उत्पादन क्षेत्र की स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आ जाती।
भारत से वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान बासमती चावल का शानदार निर्यात हुआ मगर गैर बासमती चावल के शिपमेंट में भारी गिरावट आ गई।
चालू वित्त वर्ष में भी निर्यात प्रदर्शन कमजोर रहने की संभावना है क्योंकि सफेद साबुत चावल के साथ-साथ 100 प्रतिशत टूटे (ब्रोकन) चावल का व्यापारिक निर्यात भी लम्बे अरसे से बंद है।
गैर बासमती सेला चावल के निर्यात पर 20 प्रतिशत का सीमा शुल्क लागू है। केन्द्रीय पूल में मौजूद चावल के विशाल स्टॉक को घटाने के लिए सरकार विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है।
इसके तहत पुनः खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के जरिए 2800 रुपए प्रति क्विंटल के आरक्षित मूल्य के साथ इसे बेचने की घोषणा की गई है।
इसके अलावा एथनॉल निर्माण के लिए चावल का कुछ स्टॉक आवंटित करने पर विचार हो सकता है। राज्य सरकारों को निश्चित मूल्य पर भारतीय खाद्य निगम के डिपो से चावल का उठाव करने की अनुमति दी गई है।
सरकार चावल का स्टॉक घटाने के लिए बेचैन है ताकि अगले सीजन में खरीदे जाने वाले नए चावल के सुरक्षित भंडारण के लिए गोदामों में पर्याप्त खाली स्थान मौजूद रह सके।
