घरेलू आपूर्ति बढ़ाने पर सरकार का ध्यान होने से चावल निर्यात प्रभावित होने की आशंका

01-Dec-2025 11:06 AM

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार का ध्यान अक्सर घरेलू प्रभाग में चावल की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनाने और कीमतों को नियंत्रण में रखने पर केन्द्रित रहता है जिससे इसके निर्यात सम्बन्धी नियमों में परिवर्तन होता रहता है। इसके फलस्वरूप निर्यातक प्राय: दुविधा एवं अनिश्चितता के भंवर जाल में फंसे रहते हैं। 

निस्संदेह भारत पिछले एक दशक से भी अधिक समय से दुनिया में चावल का सबसे प्रमुख निर्यातक देश बना हुआ है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत से 12.95 अरब डॉलर मूल्य के 201 लाख टन चावल का निर्यात हुआ था।

उससे पूर्व 2023-24 के अधिकांश दिनों तक गैर बासमती सफेद (कच्चे) चावल के व्यापारिक निर्यात पर प्रतिबंध लगा हुआ था और सेला चावल पर निर्यात शुल्क लगाया गया था। बासमती चावल के लिए भी न्यूनतम निर्यात मूल्य का निर्धारण हुआ था। इससे निर्यातकों को काफी परेशानी हुई थी।

हालांकि घरेलू प्रभाग में 2024-25 के पूरे सीजन के दौरान चावल का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ और 2025-26 के खरीफ सीजन में भी शानदार उत्पादन होने का अनुमान है जिससे इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता का कोई संकट फिलहाल नहीं है और कीमतों में भी स्थिरता या नरमी का माहौल बना हुआ है जिससे इसके निर्यात की उदारवादी नीति जारी रह सकती है लेकिन पासा कब पलट जाएगा- यह किसी को नहीं पता।

दरअसल सरकार अचानक किसी निर्णय की घोषणा कर देती है जिससे निर्यातकों को संभलने का अवसर नहीं मिल पाता है। उसे नई रणनीति बनाने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जाता है। 

सरकार की प्राथमिकता घरेलू खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की रहती है जो सैद्धांतिक रूप से सही भी है। इसके कई कारण भी है।

मौसम की अनिश्चित स्थिति, उपज दर में बदलाव, घरेलू खपत में वृद्धि एवं महंगाई आदि कारणों से सरकार की चिंता बनी रहती है।

अभी सरकार के पास चावल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घरेलू बाजार में भी इसकी भरपूर आपूर्ति हो रही है इसके निर्यात के लिए कोई खतरा नहीं है।