घरेलू खपत बढ़ने से चीनी के निर्यात में आ रही है गिरावट
25-May-2026 05:53 PM
नई दिल्ली। घरेलू प्रभाग में चीनी की मांग एवं खपत नियमित रूप से बढ़ती जा रही है और केन्द्र सरकार इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति को सुगम बनाने तथा कीमतों में तेजी पर अंकुश लगाने को प्राथमिकता दे रही है। प्राथमिकता की सूची में एथनॉल का उत्पादन बढ़ाना दूसरे नम्बर पर है जबकि निर्यात को तीसरे या अंतिम स्थान पर रखा गया है।
वर्ष 2019-20 से 2022-23 के मार्केटिंग सीजन तक चीनी के निर्यात की स्थिति बेहतर थी और एक बार तो इसका शिपमेंट उछलकर 110 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था लेकिन बाद में उत्पादन की स्थिति अनिश्चित होने लगी और उससे निर्यात पर असर पड़ने लगा।
2025-26 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन की हालत भी इससे भिन्न नहीं है। चीनी के निर्यात को 'मुक्त' सूची से हटाकर 'प्रतिबंधित' सूची में डाल दिया गया है जिसका मतलब यह है कि सरकार की पूर्व अनुमति के बगैर निर्यातक चीनी का अनुबंध और शिपमेंट नहीं कर सकते हैं। सरकार भी तमाम पहलुओं का गहराई से अध्ययन- विश्लेषण करने के बाद ही चीनी के निर्यात कोटे का निर्धारण करती है।
2025-26 के वर्तमान मार्कटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के लिए सरकार ने दो चरणों में औपचारिक रूप से 20 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति देने की घोषणा की और इसमें से करीब 15.90 लाख टन का कोटा भी वितरित कर दिया।
लेकिन जब यह संकेत मिलने लगा कि अल नीनो मौसम चक्र के प्रभाव से 2026-27 सीजन के दौरान गन्ना एवं चीनी के उत्पादन में कमी आ सकती है तब सरकार ने चीनी के निर्यात पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया।
दरअसल 2025-26 के सीजन में देश के अंदर उम्मीद से बहुत कम चीनी का उत्पादन हुआ जो इसकी कुल संभावित घरेलू मांग एवं जरूरत से भी कम है। उद्योग के पास चालू मार्केटिंग सीजन के अंत में चीनी का सीमित बकाया स्टॉक बचेगा। इसे देखते हुए सरकार कोई अतिरिक्त जोखिम नहीं उठाना चाहती है।
