घरेलू प्रभाग में जटिल आपूर्ति के बीच गेहूं का भाव मजबूत
16-Dec-2024 05:23 PM
नई दिल्ली । यद्यपि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने अपने स्टॉक से खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत गेहूं उतारना शुरू कर दिया है और मिलर्स- प्रोसेसर्स इसकी खरीद में जबरदस्त दिलचस्पी भी दिखा रहे हैं लेकिन फिर भी प्रमुख उत्पादक राज्यों की महत्वपूर्ण थोक मंडियों में आपूर्ति एवं उपलब्धता की जटिल स्थिति के कारण इस खाद्यान्न का भाव मजबूत बना हुआ है।
उल्लेखनीय है कि गेहूं पर लम्बे समय से स्टॉक सीमा लागू है और हाल ही में इसकी धारिता (मात्रा) में भारी कटौती भी की। इतना ही नहीं बल्कि मई 2022 से ही गेहूं के व्यापारिक निर्यात पर प्रतिबंध भी लगा हुआ है।
दरअसल पिछले तीन साल से गेहूं का घरेलू उत्पादन उम्मीद के अनुरूप नहीं हो रहा है। सरकारी आंकड़ों की बात अलग है। इसके फलस्वरूप केन्द्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक घटते हुए अब 2007-08 के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गया है और घरेलू बाजार भाव भी काफी ऊंचे स्तर पर मजबूती से डटा हुआ है। सरकार का कोई भी प्रयास और उपाय इसे नीचे लाने में सफल नहीं हो रहा है।
हालांकि कुल मिलाकर राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से कुछ आगे चल रहा है और अधिकांश इलाकों में खेतों की मिटटी में नमी का पर्याप्त अंश मौजूद है जबकि बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर भी पिछले साल से ऊंचा है लेकिन पंजाब,
हरियाणा एवं राजस्थान जैसे उच्च उपज दर वाले प्रांतों में बिजाई कम होने तथा तापमान ऊंचा रहने से गेहूं के अगले उत्पादन के प्रति अनिश्चितता बनी हुई है। वैसे भी नियत आदर्श समय के बाद जहां बिजाई हुई है वहां उपज दर में गिरावट आने की आशंका है।
1 दिसम्बर 2024 को केन्द्रीय पूल में 206 लाख टन गेहूं का स्टॉक मौजूद था। लगभग 15 लाख टन गेहूं की जरूरत प्रत्येक महीने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में आपूर्ति के लिए पड़ती है।
नए गेहूं की आवक अप्रैल में जोर पकड़ेगी जबकि दिसम्बर से मार्च के चार महीनों में लगभग 60 लाख टन गेहूं का वितरण होगा। 25 लाख टन गेहूं की बिक्री खुले बाजार बिक्री योजना के तहत की जाएगी। 1 अप्रैल को केन्द्रीय पूल में 74.60 लाख टन गेहूं का स्टॉक होना जरुरी है।
