घरेलू प्रभाग में पर्याप्त स्टॉक होने से गेहूं के आयात की जरूरत नहीं

28-May-2025 07:28 PM

नई दिल्ली। चालू वर्ष के दौरान केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की सरकारी खरीद बढ़कर पिछले चार साल के शीर्ष स्तर पर पहुंच गई और सरकार के पास इसका कुल स्टॉक बढ़कर 400 लाख टन से ऊपर पहुंच गया।

पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष गेहूं के घरेलू उत्पादन में कम से कम 40 लाख टन की वृद्धि हुई है और प्राइवेट क्षेत्र द्वारा भी किसानों से इसकी भारी खरीद की गई है। इसे देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि इस वर्ष विदेशों से गेहूं के आयात की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। 

गेहूं के आयात पर पिछले अनेक वर्षों से 40 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगा हुआ है और पिछले तीन साल से सरकारी खरीद नियत लक्ष्य से काफी कम होने के बावजूद सरकार ने इसे कम या खत्म नहीं किया। हालांकि देश में आमतौर पर गेहूं का आयात नहीं हो रहा है

मगर दक्षिण भारत के कुछ फ्लोर मिलर्स ऑस्ट्रेलिया से थोड़ी-बहुत मात्रा में इसे मंगाते रहे हैं। वहां से अधिक प्रोटीन के अंश वाले उच्च क्वालिटी के गेहूं का आयात होता है जिसे घरेलू गेहूं में मिलाकर उपयोग में लाया जाता है। 

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार गेहूं की घरेलू पैदावार एवं सरकारी खरीद में अच्छी वृद्धि हुई है। फ्लोर मिलर्स एवं व्यापारियों के पास भी इसका अच्छा स्टॉक है। सरकारी खरीद 297 लाख टन की सीमा को पार कर चुकी है।

इसके फलस्वरूप आपूर्ति की स्थिति आगामी महीनों के दौरान दुविधाजनक बनी रहेगी और विदेशों से इसके आयात की जरूरत नहीं पड़ेगी। आयात के बगैर ही घरेलू मांग एवं जरूरत को आसानी से पूरा किया जा सकेगा। 

गेहूं की सरकारी खरीद वर्ष 2022 में 188 लाख टन, 2023 में 262 लाख टन तथा 2024 में 266 लाख टन पर सिमट गई थी जबकि चालू वर्ष के दौरान बढ़कर 300 लाख टन के करीब पहुंच जाने की संभावना है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि इस वर्ष रबी मार्केटिंग शुरू होने के समय सरकार के पास लगभग 118 लाख टन गेहूं का पिछला स्टॉक मौजूद था जिससे कुल उपलब्धता की स्थिति बेहतर हो गई है। गेहूं का स्टॉक किसानों के पास भी बचा हुआ है।