इंडोनेशिया में चावल का सरकारी स्टॉक 40 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान

14-May-2025 11:26 AM

जकार्ता। दक्षिण-पूर्व एशिया में अवस्थित देश- इंडोनेशिया में चावल का स्टॉक बढ़कर 40 लाख टन की सीमा को पार करते हुए सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच जाने की संभावना है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार चावल का आरक्षित स्टॉक 37 लाख टन पर पहले ही पहुंच चुका है जबकि इसकी खरीद की प्रक्रिया जारी है। 

वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इंडोनेशिया में सरकारी अनाज खरीद एजेंसी का निर्माण वर्ष 1969 में हुआ था और तब से लेकर अब तक पहली बार चावल का आरक्षित स्टॉक 37 लाख टन पर पहुंचा हैं। इससे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के सरकारी प्रयासों की सफलता का स्पष्ट संकेत मिलता है। 

इंडोनेशिया के कृषि मंत्री ने इस शानदार उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा है कि यह किसानों, केन्द्र सरकार एवं प्रांतीय प्रशासन के संयुक्त प्रयासों तथा बुलॉग (सरकारी एजेंसी) की सक्रियता का सुखद परिणाम है।

बुलॉग ने समूचे देश में किसानों द्वारा उत्पादित धान की खरीद में अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इसलिए चावल के स्टॉक में निरन्तर बढ़ोत्तरी होती रही।

इंडोनेशिया की खाद्य सुरक्षा के लिए यह ऐतिहासिक पल है। चावल का सरकारी स्टॉक पिछले 57 साल के शीर्ष स्तर पर पहुंच चुका है। यह केवल संख्या नहीं है बल्कि इस बात का ठोस प्रमाण भी है कि सरकार किसानों के कल्याण और उसके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और घरेलू खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 

उद्योग-व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि सरकारी गोदामों में विशाल स्टॉक मौजूद रहने से इंडोनेशिया को विदेशों से चावल के आयात पर निर्भरता घटाने में काफी सहायता मिलेगी। इससे थाईलैंड और फिलीपींस जैसे आपूर्तिकर्ता देशों की कठिनाई बढ़ने की आशंका है।

इंडोनेशिया की सीमित खरीद होने पर इन निर्यातक देशों को अपने चावल के लिए अन्य बाजारों पर निर्भरता बढ़ानी पड़ेगी जबकि उन बाजारों में भारत, पाकिस्तान एवं म्यांमार सहित कई अन्य निर्यातक देश पहले से ही सक्रिय हैं। 

कृषि मंत्री के मुताबिक वैश्विक स्तर पर बढ़ते खाद्य संकट एवं इंडोनेशिया में बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए चावल के इस शानदार स्टॉक का महत्व और भी बढ़ जाता है।

बुलॉग ने महज पांच महीनों में चावल की रिकॉर्ड खरीद करने में सफलता हासिल कर ली जबकि पूर्ववर्ती वर्षों में खरीद की गति काफी धीमी रही थी। इंडोनेशिया में भारत से भी चावल का अनियमित आयात होता रहा है।