ईरान-अमरीका युद्ध एवं अल नीनो से चावल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका
30-Apr-2026 08:38 PM
हनोई। पश्चिम एशिया में इजरायल एवं अमरीका के साथ ईरान का युद्ध (तनावपूर्ण स्थिति) जारी रहने और होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बंद होने से ऊर्जा स्रोतों (ईंधन) तथा रासायनिक उर्वरकों का आयात खर्च काफी ऊंचा बैठ रहा है जिससे दक्षिण एशिया एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रमुख चावल उत्पादक देशों में धान की खेती पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। वहां धान के उत्पादन क्षेत्र में गिरावट आने की संभावना है।
इसके अलावा चालू वर्ष के दौरान अल नीनो मौसम चक्र का गंभीर प्रकोप भी कई देशों पर पड़ने वाला है जिससे वहां बारिश कम हो सकती है और मौसम शुष्क तथा गर्म रह सकता है। धान की फसल के लिए यह स्थिति अनुकूल नहीं होगी और इससे उत्पादन में असर पड़ सकता है।
अगर उर्वरकों की कमी तथा ऊंची कीमत की समस्या आगे भी बरकरार रही तो 2026-27 सीजन के दौरान चावल के वैश्विक उत्पादन का परिदृश्य काफी कमजोर हो सकता है और थाईलैंड, वियतनाम, म्यांमार, पाकिस्तान तथा कम्बोडिया जैसे देशों में चावल के निर्यात योग्य अधिशेष स्टॉक में कमी आ जाएगी।
इससे वैश्विक स्तर पर आपूर्ति की जटिलता बढ़ने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। एशिया एवं अफ्रीका के अनेक देशों को प्रति वर्ष अपनी घरेलू खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विदेशों से विशाल मात्रा में चावल का आयात करने की आवश्कयता पड़ती है।
जहां तक भारत का सवाल है तो पश्चिम एशिया संकट तथा अल नीनो के संभावित प्रकोप से सरकार ज्यादा चिंतित नहीं है। सरकार का कहना है कि देश में सिंचाई की अच्छी सुविधा मौजूद है इसलिए कमजोर मानसून के बावजूद धान की खेती पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा
इसके साथ-साथ रासायनिक उर्वरकों की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। सरकार विदेशों से ऊंचे दाम पर उर्वरक मंगा रही है और स्वयं सब्सिडी का भार उठाकर किसानों को उचित मूल्य पर इसकी आपूर्ति कर रही है।
भारत दुनिया में चावल का सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश है इसलिए यहां अगर उत्पादन एवं निर्यात योग्य स्टॉक में गिरावट आई तो वैश्विक बाजार भाव तेजी से बढ़ सकता है।
