जलवायु परिवर्तन से देश के अनेक जिलों में सूखा एवं बाढ़ का खतरा

16-Dec-2024 06:02 PM

नई दिल्ली । भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन एवं ग्लोबल   वार्मिंग के प्रकोप से पटना (बिहार), अलापुझा (केरल) तथा केन्द्रापाड़ा (उड़ीसा) सहित देश के कम से कम 11 जिलों में बाढ़ तथा सूखे का अत्यन्त जबरदस्त खतरा है जिसे रोकने के लिए तत्काल एहतियाती कदम उठाने की सख्त आवश्यकता है।

रिपोर्ट के अनुसार देश के 51 जिलों में बाढ़ का जोखिम अत्यन्त ज्यादा और 118 अन्य जिलों में ज्यादा है। इसके तहत आने वाले संवेदनशील राज्यों में आसाम, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, उड़ीसा तथा जम्मू कश्मीर मुख्य रूप से शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के 91 जिलों की पहचान सूखा के अत्यन्त उच्च जोखिम वाले क्षेत्र तथा 188 अन्य जिलों की पहचान उच्च जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में की गई है।

बिहार, आसपास, झारखंड, उड़ीसा तथा महाराष्ट्र जैसे राज्यों के अनेक जिले इसमें सम्मिलिति हैं। अन्य प्रांतों के जिलों में भी बाढ़ तथा सूखे का खतरा उत्पन्न हो सकता है।

भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए यह रिपोर्ट डराने वाली है क्योंकि देश में लगभग आधा कृषि क्षेत्र अब भी वर्षा पर ही आश्रित है। यदि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के प्रदर्शन में खराबी आई तो कहीं अत्यन्त मूसलाधार बारिश से भयंकर बाढ़ आ सकती है और कहीं वर्षा का घोर अभाव होने पर गंभीर सूखे का संकट पैदा हो सकता है।

इससे कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और घरेलू खाद्य सुरक्षा के लिए समस्या उत्पन्न हो जाएगी। देश के पूर्वी राज्यों में धान (चावल) तथा पश्चिमी प्रांतों में दलहन-तिलहन फसलों का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। अन्य राज्यों में भी खरीफ एवं रबी सीजन की फसलों की पैदावार होती है।