जम्मू कश्मीर में कम हिमपात एवं ऊंचे तापमान से कृषि उत्पादन प्रभावित होने की संभावना

13-Feb-2025 03:39 PM

श्रीनगर। कश्मीर घाटी यद्यपि अभी पीक शीतकालीन दौर से गुजर रही है जहां आमतौर पर मौसम काफी ठंडा होना चाहिए था लेकिन इसके विपरीत न केवल तापमान सामान्य स्तर से ऊंचा चल रहा है और गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है बल्कि इस बार वहां बर्फबारी (हिमपात) में भी काफी कमी देखी जा रही है।

जनवरी-फरवरी के दौरान वहां बारिश काफी कम हुई है जिससे कृषि क्षेत्र पर बुरा असर पड़ सकता है और पेयजल का संकट भी आगामी समय में उत्पन्न होने का खतरा रहेगा। 

मौसम विभाग के मुताबिक 1 जनवरी से 6 फरवरी 2025 के बीच कश्मीर में सामान्य औसत से 76.87 प्रतिशत कम बारिश हुई।

इस अवधि में वहां 99.07 मि०मी० की औसत वर्षा आंकी जाती है जो इस बार 22.91 मि०मी० तक ही पहुंच सकी। इसी तरह जम्मू डिवीजन में भी वर्षा में 80.27 प्रतिशत की जोरदार गिरावट दर्ज की गई।

जनवरी 2025 में तापमान भी  सामन्य औसत से ऊपर यानी 6-7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दक्षिणी कश्मीर में फ्रीजिंग तापमान के बावजूद समीक्षाधीन अवधि में सतह के तापमान में असाधारण उछाल देखा गया।

इसमें करीब 10 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हो गई। इसका कारण वायु में आयी गर्माहट रही। वैसे तापमान में हुई बढ़ोत्तरी में बर्फ के पिघलने की रफ्तार बढ़ गई। 

21 दिसम्बर से 29 जनवरी तक कश्मीर घाटी में फसल कटाई का चरण रहता है जिसे चिलई कलान कहा जाता है इस अवधि के दौरान वहां आमतौर पर तापमान शून्य डिग्री के आसपास या उससे भी नीचे रहता है जबकि भारी बर्फबारी होती है। मौसम विभाग ने ला नीना मौसम चक्र के प्रभाव से से 2024-25 के सीजन में जोरदार बारिश होने की संभावना व्यक्त की  थी।

इस तरह की घटना 2018 -19 एवं 2021-22 में हो चुकी थी लेकिन कश्मीर घाटी में बफबारी बहुत कम हुई जिससे किसानों को फसलों की सिंचाई की चिंता सता रही है। इससे नदियों-झीलों तथा झरनों में जल स्तर घटने की संभावना है।