जून से भारतीय चावल का निर्यात जोर पकड़ने की उम्मीद
04-Apr-2025 06:08 PM
हैदराबाद। चावल के वैश्विक निर्यात बाजार में कीमतों की दृष्टि से भारतीय उत्पाद धीरे-धीरे प्रतिस्पर्धी या आकर्षण स्तर पर आने लगा है जिससे आगामी महीनों में इसके शिपमेंट की गति तेज होने की उम्मीद है।
पिछले एक माह के दौरान 5 प्रतिशत टूटे चावल के निर्यात ऑफर मूल्य में 20 डॉलर प्रति टन तथा सेला चावल के ऑफर मूल्य में 14 डॉलर प्रति टन की गिरावट आ चुकी है।
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए प्रतीत होता है कि जून 2025 से एक बार फिर भारतीय चावल का जोरदार निर्यात आरंभ हो जाएगा।
उस समय तक वियतनाम एवं पाकिस्तान में निर्यात योग्य चावल का स्टॉक घटकर काफी कम रह जाएगा और उसके दाम में भी इजाफा होगा। इससे भारतीय चावल की मांग तेजी से बढ़ेगी।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार एक कारक अभी भारत के पक्ष में जा रहा है कि पाकिस्तान और वियतनाम की तुलना में भारतीय चावल काफी हद तक प्रतिस्पर्धी मूल्य स्तर पर आ गया है।
वैसे थाईलैंड भी अपने चावल के निर्यात ऑफर मूल्य में कटौती कर रहा है। राईस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि चालू कैलेंडर वर्ष की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च - 2025) के दौरान भारतीय चावल के निर्यात की गति कुछ धीमी रही।
लेकिन अब चूंकि अब ऑफर मूल्य में गिरावट आ गई है इसलिए खरीदार फिलहाल यह देखने के लिए 'इंतजार करो और देखो' की नीति अपना रहे हैं कि चावल के दाम में और कमी आती है या नहीं।
जैसे ही उसे चावल के मूल्य में स्थिरता आने का आभास होगा, वे इसकी खरीद में सक्रिय हो जाएंगे। चावल की कीमतों में आगे और गिरावट आने की संभावना बहुत कम है क्योंकि यह पहले ही घटकर काफी नीचे आ चुकी है।
उल्लेखनीय है कि भारत दुनिया में चावल का सबसे अग्रणी निर्यातक और दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक देश है। सरकार ने सभी किस्मों एवं श्रेणियों के चावल के निर्यात को पूरी तरह स्वतंत्र कर दिया है।
100 प्रतिशत टूटे चावल का निर्यात आरंभ होने से भारत की अग्रता और बढ़ जाएगी। देश में चावल का पर्याप्त निर्यात योग्य स्टॉक उपलब्ध है।
