कमजोर बाजार भाव के बावजूद मक्का की खेती में किसानों का उत्साह बरकरार

02-Dec-2025 11:33 AM

नई दिल्ली। हालांकि खरीफ कालीन मक्का की जोरदार आवक होने तथा पॉल्ट्री उद्योग एवं एथनॉल निर्माताओं की मांग कमजोर रहने से इस सर्वाधिक महत्वपूर्ण मोटे अनाज का भाव घटकर सरकारी समर्थन मूल्य से काफी नीचे आ गया है लेकिन फिर भी मौजूदा रबी सीजन में इसकी खेती के प्रति किसानों में उत्साह एवं आकर्षण बरकरार है।

उपलब्ध सरकारी आंकड़े के अनुसार वर्तमान रबी सीजन में राष्ट्रीय स्तर पर 28 नवम्बर तक मक्का का उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 8.76 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 7.25 लाख हेक्टेयर से 1.51 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।

रबी कालीन मक्का का सामान्य औसत क्षेत्रफल  इस बार 23.61 लाख हेक्टेयर आंका गया है और बिजाई में हो रही प्रगति को देखते हुए मक्का का कुल रकबा इस स्तर तक पहुंच जाने की उम्मीद है। 

मोटे अनाजों का कुल उत्पादन क्षेत्र भी पिछले साल के 26.58 लाख हेक्टेयर से 2.48 लाख हेक्टेयर से बढ़कर इस बार 29.06 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है।

मक्का के साथ-साथ ज्वार रागी एवं जौ की बिजाई भी बढ़ रही हैा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल की तुलना में चालू रबी सीजन के दौरान ज्वार का उत्पादन क्षेत्र 14.43 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 14.98 लाख हेक्टेयर, रागी का रकबा 55 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 56 हजार हेक्टेयर तथा जौ का क्षेत्रफल 4.27 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 4.60 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।

जौ का सामान्य औसत क्षेत्रफल 5.63 लाख हेक्टेयर नियत हुआ है जबकि बिजाई क्षेत्र इससे महज एक लाख हेक्टेयर पीछे है।

सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त- राजस्थान में जौ की बिजाई में किसान अच्छी दिलचस्पी दिखा रहे हैं जिसमें वहां इसका क्षेत्रफल बढ़ रहा है। वहां उत्पादकों को बेहतर मूल्य प्राप्त होता रहा है। 

ज्वार की बिजाई महाराष्ट्र में कुछ पिछड़ रही थी मगर अब धीरे-धीरे इसमें सुधार आने के संकेत मिलने लगे हैं। मोटे अनाजों की बिजाई अगले कई सप्ताहों तक जारी रहेगी। इसका सामान्य औसत क्षेत्रफल 55.33 लाख हेक्टेयर नियत हुआ है।