कमजोर निर्यात मांग के कारण लालमीर्च का भाव घटने से उत्पादक चिंतित

17-Dec-2024 03:57 PM

गुंटूर । आंध्र प्रदेश के लालमिर्च उत्पादक फिलहाल कमजोर बाजार भाव से चिंतित और परेशान हैं। एशिया में लालमिर्च के सबसे बड़े व्यापारिक केन्द्र- गुंटूर मिर्ची यार्ड में हाल के सप्ताहों के दौरान इस महत्वपूर्ण मसाले की विभिन्न किस्मों के दाम में भारी गिरावट  आई है और उत्पादकों को नीचे मूल्य पर अपना उत्पाद बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है।

आमतौर पर वर्ष के अंतिम महीनों में लालमिर्च का भाव ऊंचा और तेज रहता है लेकिन इस बार बेहतर उत्पादन, ऊंचे स्टॉक तथा कमजोर वैश्विक मांग के कारण इसकी कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। 

व्यापार विश्लेषकों के अनुसार कुर्नूल, नान्दयाल, डाचे पल्ली और सत्तेनापल्ली जैसे दूरस्थ इलाकों के साथ-साथ तेलंगाना के उत्पादक भी ऊंचे दाम एवं बेहतर आमदनी की उम्मीद से गुंटूर मंडी में अपनी लालमिर्च का स्टॉक लेकर पहुंच रहे हैं जिससे वहां माल की आवक काफी बढ़ गई है। लेकिन इसके मुकाबले मांग एवं उठाव कमजोर है। इसके फलस्वरूप कीमतों में नरमी का माहौल बना हुआ है। 

जानकारों के मुताबिक गुंटूर मंडी में औसतन लालमिर्च की 1.50 लाख से अधिक टिक्की के कारोबार का संचालन होता है और वहां से दुनिया के 20 से ज्यादा देशों को इसका निर्यात किया जाता है।

इसके फलस्वरूप वहां करीब 10,000 करोड़ रुपए का वार्षिक कारोबार हो जाता है और राज्य सरकार को भी 100 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होता है।

लेकिन हाल के दिनों में वहां लालमिर्च की प्रमुख किस्मों के दाम में 1000 से 2000 रुपए प्रति क्विंटल तक की भारी गिरावट आने से उत्पादकों को काफी नुकसान हो रहा है।

वर्तमान समय में गुंटूर मंडी परिसर में लालमिर्च का भाव तेजा एस 17 के लिए 13000/16000 रुपए प्रति क्विंटल, 334 सन्नाम के लिए 11000 से 14,500 रुपए, ब्यादगी 5531/668 के लिए 9000/12000 रुपए, 341 के लिए 10000/14000 रुपए, डीडी के लिए 11000/14000 रुपए तथा आरमूर के लिए 9000 से 11,500 रुपए के बीच चल रहा है। 

व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक चीन, बांग्ला देश एवं वियतनाम जैसे प्रमुख आयातक देशों में भारतीय लालमिर्च की मांग कमजोर पड़ गई है।  समझा जाता है कि बांग्ला देश के पास अगले माह की खपत के लिए लालमिर्च का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।