कीमतों में अस्थिरता रोकने हेतु गेहूं पर लगाई गई भंडारण सीमा
04-Jun-2025 08:11 PM
नई दिल्ली। हालांकि केन्द्र सरकार द्वारा इस वर्ष खरीद का सीजन औपचारिक तौर पर समाप्त होने से करीब एक माह पूर्व ही गेहूं पर दोबारा भंडारण सीमा (स्टॉक लिमिट) का आदेश लागू कर दिया गया जिससे व्यापारिक समुदाय हैरान, निराश एवं नाखुश है लेकिन इसके बारे में सरकार की अपनी दलील है।
वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों के अनुसार गेहूं की कीमतों में आ रही तेजी पर अंकुश लगाने तथा खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने के लिए भंडारण सीमा लागू करना आवश्यक समझा गया।
परम्परागत रूप से देश में मार्च से मई तक की अवधि को गेहूं की आपूर्ति का पीक समय माना जाता है और यह उम्मीद की जाती है कि इस अवधि में बाजार भाव नरम या स्थिर रहेगा।
समझा जाता है कि वर्तमान समय में सरकार गेहूं जैसे आवश्यक खाद्य उत्पाद की कीमतों को लेकर काफी सतर्क और सवेदनशील है। चालू वर्ष के अंतिम महीनों में बिहार विधानसभा का चुनाव होने वाला है और ऐसे समय में सरकार महंगाई का कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है।
सरकार का इरादा गेहूं सहित तमाम अन्य आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में अचानक आने वाली तेजी पर लगाम कसने का है।
सरकार निकट भविष्य में खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत अपने स्टॉक से गेहूं बेचने की प्रक्रिया आरंभ करने का संकेत दे चुकी है। स्टॉक सीमा भी उस व्यापक योजना का ही एक भाग है जिसका उद्देश्य गेहूं के दाम को स्थिर रखना है।
