कपास की उपलब्धता एवं कीमत पर सरकार की गहरी नजर

02-Dec-2025 08:37 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय कपड़ा मंत्रालय में राज्य मंत्री ने कहा है कि सरकार घरेलू प्रभाग में कपास की कीमतों में स्थिरता के माहौल को बरकरार रखने हेतु अनेक उपाय कर रही है ताकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रूई की कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव के प्रभाव से स्वदेशी टेक्सटाइल उद्योग को बचाया जा सके।

रूई की कीमतों में उतार-चढ़ाव मुख्यतः इसकी मांग एवं आपूर्ति के समीकरण पर निर्भर करता है और अंतर्राष्ट्रीय बाजार की हलचल से भी यह प्रभावित होता है।

इसे ध्यान में रखते हुए कपड़ा मंत्रालय वस्त्र सलाहकार समूह के माध्यम से लगातार सभी सम्बद्ध के साथ सम्पर्क में रहता है और उसके अनुरूप नीतियों में आवश्यक बदलाव करता है। 

रूई के आयात पर पहले 11 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगा हुआ था मगर घरेलू उद्योग की मांग पर सरकार ने इसे वापस ले लिया। 31 दिसम्बर 2025 तक रूई के आयात पर सीमा शुल्क नहीं लगेगा।

दूसरी ओर किसानों के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने कपास के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भारी बढ़ोत्तरी कर दी है और अपनी अधीनस्थ एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) के माध्यम से किसानों से भारी मात्रा में इसकी खरीद भी कर रही है।

पिछले मार्केटिंग सीजन में कपास की सरकारी खरीद बढ़कर 100 लाख गांठ के करीब पहुंच गई थी। घरेलू प्रभाग में कपास की आपूर्ति उपलब्धता एवं कीमत पर सरकार की गहरी नजर है और आगे भी सभी सम्बन्ध पक्षों के हितों में संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रयास जारी रखे जाएंगे।