कपास के उत्पादन, आयात एवं निर्यात में गिरावट आने का अनुमान
11-Dec-2025 02:03 PM
मुम्बई। कपास उत्पादन एवं उपयोग समिति (सीसीपीसी) ने 2024-25 सीजन की तुलना में 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान रूई के उत्पादन आयात एवं निर्यात में कमी आने का अनुमान लगाया है।
उल्लेखनीय है कि इस समिति में कपास क्षेत्र के सभी सम्बद्ध पक्षों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं और इसलिए इसके आंकड़े को काफी हद तक विश्वसनीय माना जाता है।
चालू सप्ताह के आरंभ में इस समिति की एक समीक्षा बैठक आयोजित हुई जिसमें रूई की बैलेंस शीट पर गम्भीरतापूर्वक विचार किया गया।
समिति की रिपोर्ट के अनुसार 2024-25 सीजन के दौरान देश में कुल 297.24 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) कपास का उत्पादन हुआ था जबकि 2025-26 के सीजन में यह घटकर 292.15 लाख गांठ पर अटक जाने की संभावना है।
समिति का यह आंकड़ा केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के प्रथम अग्रिम अनुमान के अनुरूप ही है। इसी तरह समीक्षाधीन अवधि के दौरान देश में रूई का कुल आयात 41.40 लाख गांठ से गिरकर 40 लाख गांठ पर सिमटने की संभावना व्यक्त की गई है।
ध्यान देने की बात है कि इसके विपरीत एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) ने रूई का आयात 2025-26 के सीजन में उछलकर 50 लाख गांठ के शीर्ष स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया है।
समिति की रिपोर्ट के मुताबिक चालू मार्केटिंग सीजन के दौरान 45.50 लाख गांठ के पिछले बकाया स्टॉक 40 लाख गांठ के संभावित आयात एवं 292.15 लाख गांठ के अनुमानित उत्पादन के साथ घरेलू प्रभाग में रूई की कुल उपलब्धता 377.65 लाख गांठ पर पहुंच सकती है
जो 2024-25 के सीजन में 386.11 लाख गांठ पर पहुंची थी। घरेलू उपयोग एवं निर्यात के बाद चालू मार्केटिंग सीजन के अंत में यानी 30 सितम्बर 2026 को रूई का बकाया अधिशेष स्टॉक घटकर 40.65 लाख गांठ पर सिमट जाने की संभावना है। इससे पूर्व रूई का बकाया स्टॉक 30 सितम्बर 2025 को 45.50 लाख गांठ एवं 30 सितम्बर 2024 को 47.47 लाख गांठ आंका गया था।
समिति के मुताबिक 2024-25 सीजन के दौरान देश से करीब 18 लाख गांठ रूई का निर्यात हुआ था जबकि 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में यह 3 लाख गांठ घटकर 15 लाख गांठ पर अटक सकता है।
लेकिन घरेलू प्रभाग में बड़ी-बड़ी टेक्सटाइल मिलों में रूई की खपत 213 लाख गांठ होने का अनुमान है जो पिछले सीजन के लगभग बराबर ही है। रूई की गैर मिल खपत के अनुमानित आंकड़ों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है।
