केरल में पिछले एक दशक के दौरान कालीमिर्च के उत्पादन में 25 % की गिरावट
03-Apr-2025 04:57 PM
नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा है कि पिछले साल की तुलना में चालू वर्ष के दौरान केरल में काली मिर्च का उत्पादन 8-10 प्रतिशत घटने की संभावना है। मंत्री महोदय के अनुसार केरल में काली मिर्च का बागानी क्षेत्र (रकबा) 2014-15 के सीजन में 85,431 हेक्टेयर दर्ज किया गया था जो 2023-24 तक आते-आते 15 प्रतिशत घटकर 72,669 हेक्टेयर रह गया इसके फलस्वरूप समीक्षाधीन अवधि के दौरान वहां काली मिर्च का उत्पादन भी 40,690 टन से करीब 25 प्रतिशत घटकर 30,798 टन पर सिमट गया। फसल की औसत उपज दर में भी कुछ खास करने से गिरावट का रुख देखा जा रहा है।
कृषि राज्य मंत्री के अनुसार काली मिर्च के बागानों पर अक्सर रोगो-कीड़ो का भयंकर प्रकोप रहता है जिसमे फूट रोज डिजीज मुख्य रूप से शामिल है। इससे काली मिर्च की खेती में चुनौती की काफी बढ़ गई है। इसके आलावा काफी विनाशकारी बाढ़ तो कभी भयंकर सूखा से भी फसल को काफी नुकसान होता रहा है। वर्ष 2018 एवं 2019 के दौरान केरल में आई भयंकर बाढ से काली मिर्च के बागान बुरी तरह प्रभावित हुए थे बाढ का तांडव ऐसे समय में आया जब काली मिर्च का भाव नीचे चल रहा था इसके फलस्वरूप इस महत्वपूर्ण मसाला फसल की खेती के प्रति उत्पादनो का उत्साह एवं आकर्षण घट गया।
काली मिर्च के दाम में 2021-22 के सीजन तक नरमी का माहौल बना रहा और इसलिए केरल में उत्पादकों ने इसका क्षेत्रफल घटा दिया और फसल की देखभाल पर भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया। उत्पादन स्टॉक एवं घरेलू उपयोग की भांति काली मिर्च के निर्यात इ भी उतर चढ़ाव देखा गया। इसलिए अन्य निर्यातक देशो में स्टॉक की उपलब्धता एवं उसके सापेक्ष भारतीय उत्पाद की कीमतों का भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आम तौर पर वियतनाम, श्रीलंका, इंडोनेशिया एवं ब्राजील जैसे प्रमुख निर्यातक देशो की तुलना में भारतीय काली मिर्च का निर्यात ऑफर मूल्य ऊंचा रहता है क्योंकि इसकी क्वालिटी अच्छी होती है। इसके फलस्वरूप अच्छी क्वालिटी को पसंद करने वाले देश भारत से काली मिर्च मांगते है।
सरकार केरल में काली मिर्च की उपज दर एवं पैदावार बढ़ाने का प्रयास कर रही है इसके तहत वहां अछि क्वालिटी के प्लाटिंग मटेरियल का वितरण किया जा रहा है बागानी क्षेत्रो के विकास-विस्तार एवं जिन्गोद्वार में सहायता दी जा रही है तथा फसल तुड़ाई के बाद का प्रबंधन सुनश्चित किया जा रहा है। काली मिर्च के विपणन परिसरों के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
