कृषि क्षेत्र की विकास दर में कुछ कमी आने की संभावना

10-Dec-2025 04:10 PM

नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र की विकास दर 4.6 प्रतिशत दर्ज की गई थी लेकिन 2025-26 के मौजूदा वित्त वर्ष में इसके घटकर 4 प्रतिशत के आसपास रह जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

नीति आयोग के एक सदस्य का कहना है कि विकास दर में गिरावट आने की कोई ठोस कारण बताना अभी मुश्किल है लेकिन समझा जाता है कि आधारभूत प्रभाव नीचे (कम) होने से कृषि विकास दर में उतार-चढ़ाव आता रहता है।

पंजाब में इस वर्ष भयंकर बाढ़ का प्रकोप देखा गया लेकिन इसका सीमित असर ही पड़ेगा और इससे राज्य में कृषि विकास दर में गिरावट आने की संभावना बहुत कम है। बाढ़ का प्रकोप महाराष्ट्र, राजस्थान एवं तेलंगाना सहित कुछ अन्य प्रांतों में भी देखा गया। 

नीति आयोग के सदस्य का कहना था कि 2025-26 की पहली छमाही के दौरान कृषि क्षेत्र के लिए विकास के आंकड़ों को देखते हुए लगता है कि दूसरी छमाही  में यह सामान्य रहेगा लेकिन विकास दर में गिरावट की पूरी भरपाई नहीं हो पाएगी।

उद्योग- व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि यदि ला नीना मौसम चक्र तथा सोलर वार्टेक्स के प्रभाव से जनवरी-फरवरी में मौसम प्रतिकूल हुआ तो रबी फसलों को नुकसान हो सकता है। 

उल्लेखनीय है कि 2025-26 के वर्तमान वित्त वर्ष के लिए के कृषि क्षेत्र की विकास दर पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 3.7 प्रतिशत तथा दूसरी तिमाही (जुलाई-सितम्बर) में 3.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया।

वित्त वर्ष 2024-25 की सम्पूर्ण अवधि में यह विकास दर 4.63 प्रतिशत आंकी गई थी। रबी फसलों की अच्छी बिजाई हो रही है और फलों, सब्जियों, मसालों तथा अन्य बागानी एवं बागवानी फसलों के उत्पादन पर गहरी नजर रखी जा रही है।