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कृषि उत्पादों की पैदावार एवं खरीद का आंकड़ा विश्वसनीय होना जरुरी

26-Oct-2026 06:05 PM

कृषि उत्पादों की पैदावार एवं खरीद का आंकड़ा विश्वसनीय होना जरुरी

नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय प्रत्येक वर्ष खरीफ और रबी सीजन की फसलों के उत्पादन का अनुमान लगाता है और इसके आधार पर भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा धान एवं गेहूं की खरीद की मात्रा नियत की जाती है। इसी तरह दलहन-तिलहन फसलों की खरीद के लिए भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी  विपणन महासंघ (नैफेड) तथा भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) को अपनी रणनीति एवं योजना बनानी पड़ती है। 

कृषि मंत्रालय के उत्पादन अनुमान तथा सरकारी एजेंसियों की खरीद का घरेलू बाजार पर गहरा असर पड़ता है और मिलर्स, व्यापारी तथा किसान अपने-अपने तरीके से कृषि एवं खाद्य उत्पादों की खरीद बिक्री का प्लान बनाते हैं। इसके लिए आंकड़ों का विश्वसनीय, व्यावहारिक एवं सटीक होना आवश्यक है। धान (चावल) एवं गेहूं के उत्पादन का सरकारी अनुमान अक्सर खाद्य मंत्रालय तथा घरेलू बाजार को भ्रम में डाल देता है। इसी तरह दलहन-तिलहन फसलों के सरकारी अनुमान तथा व्यापारिक उत्पादन अनुमान में कई बार भारी अंतर देखा जाता है। 

यह सही है कि कृषि जिंसों के उत्पादन में कमी / वृद्धि मुख्यतः इसके बिजाई क्षेत्र एवं मौसम तथा वर्षा  की स्थिति पर निभर करती है। इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं का आघात एवं कीड़ें-रोगों का प्रकोप भी फसलों को काफी हद तक प्रभावित करता है। अतः उत्पादन का अनुमान लगते समय विभिन्न कारकों का ध्यान रखना आवश्यक है।

कई बार उत्पादन का सरकारी अनुमान जरूरत से ज्यादा बड़ा हो जाता है जिससे कुछ समय के लिए बाजार नरम पड़ सकता है। लेकिन जब मंडियों में उम्मीद के अनुरूप आवक नहीं होती है तब कीमतों में अनियंत्रित उतार-चढ़ाव आने लगता है और सरकार को जल्दबाजी में अप्रिय कदम उठाने के लिए विवश होना पड़ता है। इसमें उद्योग व्यापार क्षेत्र में असंतुलन की स्थित बन जाती है और उसे आर्थिक नुकसान होने लगता है। फिलहाल सरकारी गोदामों में खाद्यान्न का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और इसे मार्केट में उतारा भी जा रहा है।