खरीफ के बाद रबी सीजन में भी उड़द का उत्पादन घटने की संभावना
18-Dec-2024 01:40 PM
नई दिल्ली । केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2024 के खरीफ सीजन में उड़द का कुल बिजाई क्षेत्र घटकर 30.73 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया जो 2023 के क्षेत्रफल 32.60 लाख हेक्टेयर से 1.87 लाख हेक्टेयर कम था। दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन में अत्यधिक बारिश एवं बाढ़ से भी कई इलाकों में फसल को काफी क्षति हुई।
इसे ध्यान में रखते हुए कृषि मंत्रालय ने अपने प्रथम अग्रिम अनुमान में खरीफ कालीन उड़द का उत्पादन घटकर 12.09 लाख टन पर सिमटने की संभावना व्यक्त की है जो वर्ष 2023 के उत्पादन 16.04 लाख टन से 3.95 लाख टन कम है।
जहां तक रबी सीजन का सवाल है तो इसमें भी उड़द का बिजाई क्षेत्रफल 3.86 लाख हेक्टेयर से 67 हजार हेक्टेयर पीछे है। इतना ही नहीं बल्कि तमिलनाडु एवं आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में तेज हवा मूसलाधार बारिश, जल जमाव एवं बाढ़ तथा कीड़ों-रोगों के प्रकोप से उड़द की फसल को काफी नुकसान होने की सूचना भी मिल रही है। इसके फलस्वरूप उत्पादन में कमी आ सकती है।
खरीफ सीजन में उड़द का उत्पादन करीब 25 प्रतिशत घट गया और यदि रबी सीजन का उत्पादन भी इतना ही घटता है तो देश में आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति काफी जटिल हो सकती है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि खरीफ सीजन में न केवल पैदावार कम हुई बल्कि उड़द की क्वालिटी भी प्रभावित हुई। हल्की क्वालिटी के माल की ज्यादा आवक होने से अभी तक उड़द का भाव कुछ नरम या स्थिर चल रहा था मगर अब अच्छा माल पहुंचने से बाजार तेज होने लगा है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय की एक इकाई-एगमार्कनेट के आंकड़ों से पता चलता है कि दक्षिणी राज्यों में फसल को नुकसान होने की खबर से उड़द का भाव बढ़कर 8100 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है जो सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य 7400 रुपए प्रति क्विंटल से ज्यादा है।
उड़द की सरकारी खरीद लगभग बंद है क्योंकि किसानों को थोक मंडियों में सरकारी समर्थन मूल्य से ऊंचा भाव मिल रहा है।
उधर म्यांमार ने भी भारत और पाकिस्तान को शिपमेंट के लिए अपनी उड़द का निर्यात ऑफर मूल्य 10-20 डॉलर प्रति टन बढ़ा दिया है। श्रेष्ठ क्वालिटी की उड़द का फ्री ऑन बोर्ड निर्यात ऑफर मूल्य वहां अब 1085-1105 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया है।
