खाद्य निगम दो वर्षों में 50 लाख टन की सिलोज क्षमता बढ़ाने की कोशिश में
05-Jun-2026 04:40 PM
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार की अधीनस्थ एजेंसी- भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने अगले दो वर्षों में खाद्यान्न भंडारण के लिए सिलोज की क्षमता 50 लाख टन बढ़ाने का प्लान बनाया है। सरकारी- निजी भागीदारी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप या पीपीपी) मोड़ में इन सिलोज का निर्माण किए जाने की योजना है। इससे चावल और गेहूं के भंडारण में आसानी होगी।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार वर्ष 2021 से अब तक प्राइवेट कंपनियों द्वारा देश के 76 स्थानों पर कुल मिलाकर 39 लाख टन की भंडारण क्षमता वाले सिलोज का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। प्रत्येक सिलोज की भंडारण क्षमता 25 से 50 हजार टन के बीच है। खाद्य निगम को खासकर गेहूं के सुरक्षित भंडारण के लिए अतिरिक्त सिलोज की आवश्यकता है। इसके लिए निगम प्राइवेट कंपनियों का सहारा ले रहा है और ये कंपनियां भी सिलोज निर्माण में अच्छी दिलचस्पी दिखा रही हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार देश में 38 स्थानों पर 23.50 लाख टन से अधिक भंडारण क्षमता वाले सिलोज का निर्माण कार्य अभी जारी है जबकि अगले दो वर्षों में 27.20 लाख टन से अधिक क्षमता वाली आधुनिक भंडारण सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा।
पिछले तीन-चार साल से खाद्य निगम द्वारा किसानों से केन्द्रीय पूल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 300 लाख टन या इससे कम गेहूं की सालाना खरीद की जा रही थी लेकिन इस बार खरीद बढ़कर 350 लाख टन से ऊपर पहुंच गई है। इसमें भी हल्की क्वालिटी वाले बदरंग, चमकहीन तथा टूटे-चिपटे दाने के गेहूं की मात्रा ज्यादा है जिसे यूआरएस स्कीम के तहत खरीदा गया है।
वर्ष 2028 तक खाद्य निगम की कुल सिलोज क्षमता बढ़कर 90 लाख टन पर पहुंच जाने की उम्मीद है जिससे इसके भंडारण का ढांचा काफी मजबूत हो जाएगा। खाद्य निगम द्वारा गेहूं के साथ-साथ किसानों से भारी मात्रा में धान भी खरीदा जाता है।
