खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से क्षमता का अधिकतम उपयोग करने का आग्रह

12-Dec-2025 06:01 PM

मुम्बई। केन्द्र सरकार ने कृषि क्षेत्र के सहायक उद्योग से खाद्य प्रसंस्करण की आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने के लिए सभी उपलब्ध- प्रोत्साहन का अधिकतम उपयोग करने के लिए कहा है ताकि उद्योग की कुल संचित उत्पादन क्षमता के अधिक से अधिक भाग का इस्तेमाल सुनिश्चित हो सके और उसके विकास-विस्तार की प्रक्रिया निरन्तर जारी रह सके। 

केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग सचिव का कहना है कि कृषि उत्पादों की उपज दर एवं पैदावार में बढ़ोत्तरी हो रही है, घरेलू मांग एवं खपत बढ़ती जा रही है और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात प्रदर्शन में भी सुधार आने के संकेत मिल रहे है।

इसे देखते हुए स्वदेशी उद्योग को प्रोसेसिंग की क्षमता बढ़ाने, मूल्य संवर्धन और खाद्य सुरक्षा मामलों पर विशेष ध्यान देना चाहिए अन्यथा किसानों को उस लाभ एवं समृद्धि से वंचित होना पड़ेगा जिसके वे हकदार हैं।

इसके अलावा उपभोक्ताओं को भी विकल्पों का चुनाव करने, गुणवत्ता को परखने और उचित मूल्य पर उत्पाद प्राप्त करने में कठिनाई होगी। 

केन्द्र सरकार द्वारा इस क्षेत्र के लिए कुछ अच्छी योजनाएं बताई जा रही है जिसमें पीएम किसान सम्पदा योजना और प्रधानमंत्री  फार्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फ़ूड प्रोसेसिंग इंटरप्राइजेज स्कीम  मुख्य रूप से शामिल है।

इन अग्रणी (फ्लैगशिप) स्कीमों के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा उद्यमियों को बड़े पैमाने पर सहयोग-समर्थन एवं प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है।

इसमें सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए पूंजीगत सब्सिडी, शीत गृहों (कोल्ड स्टोरेज) की सुविधाओं की स्थापना के लिए 35 से 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहयोग तथा कृषि क्लस्टर्स में प्रोसेसिंग इकाइयों, परीक्षण प्रयोगशालाओं एवं इनक्यूबेशन सेंटर्स के निर्माण के लिए दिया जाने वाला प्रोत्साहन आदि शामिल है। 

फिक्की द्वारा मुम्बई में आयोजित अन्नपूर्णा इंटर खाद्य प्रदर्शनी 2025 में बोलते हुए सचिव महोदय ने उद्यमियों से कहा है कि इन स्कीमों से उन्हें विशेष प्रोत्साहन प्राप्त होता है और स्वयं सहायता समूहों को आधार भूत फंड भी प्राप्त हो जाता है जिसमें महिलाओं द्वारा संचालित समूह विशेष रूप से शामिल है। उससे उन्हें खाद्य प्रसंकरण की प्रक्रिया आरंभ करने में सहायता मिलती है।