खाद्य तेलों के निर्यातकों की नजर अगले वर्ष भारत पर रहेगी केन्द्रित

18-Dec-2024 12:27 PM

हैम्बर्ग । वर्ष 2025 में पाम तेल तथा सोयाबीन तेल के प्रमुख निर्यातक देशों का लक्ष्यांकित बाजार भारत हो सकता है जो खाद्य तेलों का दुनिया में सबसे प्रमुख आयातक देश है और जहां खाद्य तेलों की घरेलू मांग एवं खपत लगातार तेजी से बढ़ती जा रही है।

अगले साल भी भारत में विशाल मात्रा में खाद्य तेलों का आयात होगा और इसके प्रमुख निर्यातक देशों के बीच गहरी प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी। सूरजमुखी तेल का आयात भी बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। 

विशेषज्ञों के एक पैनल के अनुसार भारत वर्ष 2023 में चीन को पीछे छोड़कर संसार में सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश बन गया जबकि वह दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था वाला देश भी बना हुआ है।

भारतीय अर्थ व्यवस्था का निरंतर विकास-विस्तार हो रहा है और इसके साथ ही वहां तमाम कृषि जिंसों के साथ खाद्य तेलों की जरूरत भी बढ़ती जा रही है। 

भारत सरकार स्वदेशी उत्पादन में भारी बढ़ोत्तरी के जरिए आत्मनिर्भरता हासिल करने पर विशेष जोर दे रही है और आने वाले वर्षों में भी उसका इस दिशा में जोरदार प्रयास जारी रह सकता है।

देश के विभिन्न क्षेत्रों का तेजी से आधुनिकीकरण हो रहा है। विशेषज्ञ पैनल के मुताबिक सरकार विदेशों से आयात पर निर्भरता घटना चाहती है लेकिन इसमें लम्बा समय लग सकता है।

पहले चीन सोयाबीन तेल एवं पाम तेल का सबसे बड़ा आयातक देश हुआ करता था लेकिन वहां अर्थ व्यवस्था के विकास की गति धीमी पड़ने  से इसके आयात की रफ्तार घट गई।

इसके बाद भारत ने चीन का स्थान ले लिया जबकि चीन ने खाद्य तेल के बजाए साबुत तिलहन और खासकर सोयाबीन तथा कैनोला का आयात बढ़ाना शुरू कर दिया। लेकिन भारत में तिलहनों के बजाए खाद्य तेलों के आयात को प्राथमिकता दी गई।  

भारत में इंडोनेशिया, मलेशिया एवं थाईलैंड से पाम तेल, अर्जेन्टीना एवं ब्राजील से सोयाबीन तेल तथा रूस, रोमानिया, यूक्रेन एवं अर्जेन्टीना से सूरजमुखी तेल का विशाल आयात हो रहा है।

हाल के वर्षों में यहां सोयाबीन तेल के आयात में जबरदस्त बढ़ोत्तरी हुई है जबकि सोयाबीन का घरेलू उत्पादन एक निश्चित सीमा में स्थिर हो गया है।

सूरजमुखी की पैदावार सीमित हो रही है और ऑयल पाम की खेती पर अब तक प्रमुख कम ध्यान दिया गया है। केवल सरसों का उत्पादन संतोषजनक हो रहा है।