महंगे आयात एवं घरेलू फसल की चिंता से तुवर का भाव मजबूत
12-Sep-2026 11:36 AM
नई दिल्ली। यद्यपि सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि खरीफ सीजन की सबसे प्रमुख दलहन फसल- अरहर (तुवर) का उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 45.47 लाख हेक्टेयर से 64 हजार हेक्टेयर बढ़कर इस बार 46.61 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है लेकिन दोनों शीर्ष उत्पादक राज्यों- महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में न केवल बिजाई क्षेत्र में कमी आई है बल्कि मानसून की वर्षा भी कम हुई है जिससे फसल की प्रगति में बाधा पड़ रही है। तुवर एक लम्बी अवधि वाली दलहन फसल है इसलिए सितम्बर-अक्टूबर का मौसम इसके लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा। नई फसल की कटाई दिसम्बर-जनवरी में जोर पकड़ती है।
इस बीच भारत में उत्पादन प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए म्यांमार एवं अफ्रीकी देशों में तुवर के निर्यात ऑफर मूल्य में बढ़ोत्तरी होने लगी है। आपूर्तिकर्ता देशों को भारत में तुवर का आयात बढ़ने का भरोसा है। डॉलर की तुलना में भारती रुपया की विनिमय दर भी कमजोर बनी हुई है। एक अमरीकी डॉलर का मूल्य 94-95 रुपए के आसपास है।
तुवर का आयात महंगा होने लगा है और घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल होती जा रही है। दूसरी ओर इसकी मांग में वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं। इसके फलस्वरूप हाल के दिनों में इसके दाम में कुछ तेजी आई है और आगामी समय में भी इसका भाव ऊंचा एवं तेज रहने की उम्मीद की जा रही है।
उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों से ज्ञात होता है कि 9 सितम्बर को अखिल भारतीय स्तर पर तुवर दाल का औसत खुदरा मूल्य बढ़कर 124.04 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया। विदेशों से साबुत तुवर को आयात की आवश्यकता बरकरार रहेगी।
9 सितम्बर 2026 को तुवर का थोक (औसत) मूल्य भी बढ़कर 11471.39 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचा जो गत माह को औसत मूल्य 11,248.27 रुपए से 2 प्रतिशत एवं पिछले साल के औसत भाव 10,645.36 रुपए प्रति क्विंटल से 7.75 प्रतिशत ज्यादा है। आगे इसका भाव मजबूत बना रह सकता है।
