खरीफ फसलों की संतोषजनक बिजाई
12-Sep-2026 10:48 AM
अल नीनो के प्रभाव एवं दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर प्रदर्शन के बावजूद इस वर्ष खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 11 सितम्बर तक 1096.50 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 1112.55 लाख हेक्टयर से 16.05 लाख हेक्टेयर कम रहा।
यह गिरावट मुख्यतः धान एवं मक्का की वजह से आई है। धान का क्षेत्रफल करीब 17 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का रकबा 2.50 लाख हेक्टेयर घट गया है। इसके अलावा मूंग, सोयाबीन तथा कपास के बिजाई क्षेत्र में भी गिरावट आई है।
गन्ना का क्षेत्रफल 40 हजार हेक्टेयर पीछे है। दूसरी ओर अरहर (तुवर), उड़द, ज्वार, बाजरा, तिल एवं सूरजमुखी के उत्पादन क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है। उड़द का उत्पादन क्षेत्र 2.70 लाख हेक्टेयर तथा तिल का बिजाई क्षेत्र 1.40 लाख हेक्टेयर आगे हो गया है। इसी तरह बाजरा के बिजाई क्षेत्र में 2 लाख हेक्टेयर का इजाफा हुआ है।
वस्तुतः धान एवं मक्का को छोड़ दिया जाए तो अन्य खरीफ फसलों के उत्पादन क्षेत्र में उल्लेखनीय कमी नहीं आई है। धान और मक्का का उत्पादन क्षेत्र भी पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल से ऊपर चल रहा है लेकिन गत वर्ष से नीचे है क्योंकि पिछले साल इतना रकबा तेजी से उछलकर सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था।
मानसून की कम बारिश से खरीफ फसलों की पैदावार के प्रति चिंता बनी हुई है। दक्षिणी राज्यों में वर्षा का भारी अभाव महसूस किया जा रहा है। इसी तरह महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों के कुछ भागों में बारिश की कमी से फसलों पर असर पड़ने की आशंका है। इन प्रांतों में तुवर का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है।
उत्तरी एवं पश्चिमोत्तर भारत में स्थिति लगभग सामान्य है। मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में अच्छी वर्षा हुई है। पूर्वी भारत में हालात ज्यादा खराब नहीं हैं। सितम्बर के मौसम एवं मानसून पर सबका ध्यान केन्द्रित है क्योंकि अनेक खरीफ फसलों के उत्पादन का निर्धारण करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
